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जमीन जुतवा देने के सदमे से एक किसान की मौत

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अतरौली।
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तहसील क्षेत्र के गांव शीशई आलीपुर में 19 फरवरी को जिला बुलंदशहर के वन विभाग अधिकारियों की ओर से साठ बीघे में खड़ी गेहूं की फसल जुतवा दिए जाने के सदमे में एक किसान की मौत हो गई। यह फसल इस किसान ने बोई थी।

परिजनों का आरोप है कि शनिवार की सुबह मेरी जमीन... मेरी जमीन... कहते हुए किसान रघुनी सिंह (68) ने दम तोड़ दिया। वही गांव के ही एक अन्य किसान सुरेश सिंह की गेहूं की फसल जुतने के बाद से उनकी पत्नी सदमे में हैं, जिनका अलीगढ़ में एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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अतरौली तहसील के गांव शीशई आलीपुर व बुलंदशहर के डिबाई तहसील के गांव ऊंचागांव के किसानों के बीच कई वर्षों से सीमा विवाद चला आ रहा है।

गांव शीशई निवासी किसान राधे पुत्र रामनिवास, सालिग पुत्र रघुनी, महेंद्र पुत्र देवीराम, हरप्रसाद पुत्र सियाराम, आशाराम पुत्र रामगोपाल, रवेंद्र पुत्र रामबहादुर, मुनेश पुत्र सूरजपाल, गिरीश पुत्र नेत्रपाल सिंह, राधेश्याम पुत्र मधुरी सिंह आदि का आरोप है कि सीमा विवाद का निस्तारण बुलंदशहर जिले के पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ था।

तभी से किसान 60-70 बीघा भूमि पर फसल बोते चले आ रहे हैं, इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारियों ने उनके खिलाफ थाना रामघाट में रिपोर्ट दर्ज करा दी, जो पूरी तरह गलत है।
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किसानों के अनुसार कमिश्नर ने बुलंदशहर व अलीगढ़ के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर सीमा विवाद निपटाने के लिए राजस्व टीम गठित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कमिश्नर के आदेश के बाद भी निस्तारण की जगह सोमवार को 60 बीघे भूमि पर उगी गेहूं की फसल को जुतवा दिया था। रघुनी आदि को एक सप्ताह में जमीन को कब्जा मुक्त करने के लिए कहा गया था।
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