दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़। स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश में फर्स्ट रेफरल यूनिट्स को सक्रिय कर मातृ व शिशु दर में कमी लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके तहत डाक्टर को अपने गृह जनपद में रहने का मौका मिलेगा। पांच वर्ष तक एक ही स्थान पर तैनाती सुनिश्चित रहेगी। अब सीएमओ स्तर से डाक्टर का तबादला नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा चयन प्रक्रिया में भी दंपती को प्राथमिकता दी जाएगी।
जिले में 12 ब्लाक हैं। प्रदेश सरकार ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे गुणवत्ता वितरण और सी सेक्शन सेवाओं को सक्रिय व मजबूत बनाने के नयी रणनीति की शुरुआत कर रही है। फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में पर्याप्त प्रशिक्षित डाक्टरों की उपलब्धता से जटिलताओं का बेहतर प्रबंधन किया जायेगा, जिससे प्रसव संबंधित जटिलताओं व मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी आ सके। इस नए माडल से पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित डाक्टरों (लाइफ सेविंग एनेस्थेटिक स्किल्स ) एलएसएएस और इमरजेंसी आब्स्टेट्रिक केयर को सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही जटिलताओं के बेहतर प्रबंधन के लिए 107 प्रशिक्षित एमबीबीएस डाक्टर व 108 एलएसएएस प्रशिक्षित एमबीबीएस डाक्टरों की जोड़ी काम करेगी। यह लोग फर्स्ट रेफरल यूनिट को पूरी तरह बदलने का काम करेंगे।
इस योजना के तहत डाक्टर अपने सहयोगी के साथ साथ स्वास्थ्य सुविधा का भी चयन कर सकते हैं जिससे वे अपने सहयोगी के साथ पूरी नौकरी की अवधि में सुविधा केंद्र में सेवा पहुंचा सके। लेकिन शुरुआत में यह सहयोगी जोड़ी और स्वास्थ्य सुविधा का आवंटन अगले 5 वर्षों के लिए तय किया जाएगा। डाक्टरों को अपने गृह जिलों को भी चुनने का मौका मिलेगा। सहयोगियों और स्टाफ नर्स व अन्य तकनीशियनों को प्रत्येक सी सेक्शन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा जो वे अपनी सुविधा केंद्र पर करते हैं और प्रत्येक सहयोगी को उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करने के लिए 6 महीने के लिए जिला अस्पताल के विशेषज्ञ सहयोगी के साथ जोड़ा जाएगा।
‘अभी जिले में चार एफआरयू हैं। इनमें अतरौली, खैर, अकराबाद और छर्रा शामिल हैं। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जैसा भी शासन का आदेश निर्देश होगा, उसका पालन कराया जाएगा’
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ