न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
यह पहला मौका नहीं, जब एएमयू छात्र लाठीचार्ज का शिकार हुए हैं। पिछले एक दशक के रिकार्ड पर गौर करें तो अननिगत ऐसे मौके आए, जब छात्रों व पुलिस की भिड़ंत हुई और मजबूरन पुलिस को छात्रों पर लाठी चलानी पड़ी। सबसे आखिरी बार करीब डेढ़ साल पहले जब दिल्ली के छात्र नजीब की बरामदगी की मांग को लेकर छात्र रेलवे स्टेशन घेरने जा रहे थे, तब उन्हें लाठीचार्ज का शिकार होना पड़ा था। इसके बाद अब यह घटना घटित हुई है।
अब तक के लाठीचार्ज
वर्ष 2008 में एसएसपी रघुवीरलाल के कार्यकाल में लाठीचार्ज हुआ
वर्ष 2009 में एसएसपी असीम अरुण के कार्यकाल में स्टेशन पर लाठीचार्ज
वर्ष 2011 में एसएसपी सत्येंद्रवीर सिंह के कार्यकाल में प्रॉक्टर आफिस पर लाठीचार्ज
वर्ष 2012 में एसएसपी पीयूष मोर्डिया के कार्यकाल में स्टेशन पर लाठीचार्ज
वर्ष 2012 में ही सर सैयद डे की रात एएमयू सर्किल पर ही लाठीचार्ज किया गया
वर्ष 2016 में नजीब की बरामदगी मुद्दे पर आंबेडकर पार्क के पास लाठीचार्ज
इतिहास में पहली बार सर्किल से आगे गए हिंदूवादी
एएमयू में हुए घटनाक्रम के दौरान इस तरह की चर्चाएं कैंपस के अंदर व बाहर हर जुबां पर थीं कि यह इतिहास में पहला मौका है, जब हिंदुवादी किसी मुद्दे पर एएमयू सर्किल से आगे बाब-ए-सैयद तक पहुंचे हैं। वह भी उस स्थिति में जब वह किसी मुद्दे पर विरोध कर रहे हैं और एएमयू उनके निशाने पर है। अगर शायद यह वहां तक न जाते तो शायद हालात इससे ज्यादा न बिगड़ते।
दो मिनट की लाठी में एएमयू छात्रों का गुस्सा काफूर
करीब डेढ़ घंटे से एएमयू छात्रों को पुलिस प्रशासनिक अमला मनाने में लगा हुआ था। मगर वह मानने को तैयार न थे। सीधे-सीधे पुलिस प्रशासन को चेतावनी दे रहे थे। एएमयू के अधिकारी भी अगर उन्हें समझाने आगे आ रहे थे तो उन्हें भी वह भगा दे रहे थे। उनकी चेतावनी थी कि अगर प्रशासन ने उनकी बात न मानी तो वह अपने हाथों से निपट लेंगे। कुल मिलाकर अधिकारी बेहद परेशान थे। मगर जब दो मिनट लाठी चली तो छात्रों की भीड़ और उनका गुस्सा गायब हो गया।
आरएएफ कमांडेंट और इंस्पेक्टर सिविल लाइंस रहे निशाने पर
इन छात्रों के निशाने पर शुरुआत से इंस्पेक्टर सिविल लाइंस निशाने पर रहे। कहना था कि वह हिंदुवादियों को बाब-ए-सैयद तक लेकर आए हैं। उन्हें वह बार-बार इसी बात पर चेतावनी दे रहे थे कि आपने अच्छा नहीं किया। बाद में समझाने की दृष्टि से आरएएफ के कमांडेंट ने जब उन्हें रोका और यह कहा कि आप पढ़ने आए हैं और नेतागिरी के चक्कर में क्यों पड़ रहे हैं तो छात्रों के निशाने पर वह भी आ गए और कहने लगे कि तुम हमें हमारा काम बताओगे। इसके चलते कुछ देर को दोनों को छात्रों के सामने से हटाना पड़ गया।
एसपी सिटी और सीओ से खूब हुई धक्का-मुक्की
छात्रों के बीच में उन्हें रोकने के लिए एसपी सिटी व सीओ तृतीय जमे हुए थे। वह उन्हें बार-बार रोकने की कोशिश करते, मगर छात्रों का रेला उन्हें धकेलकर सर्किल की ओर बढ़ा देता। इस दौरान इन दोनों अधिकारियों से काफी देर तक धक्का-मुक्की होती रही। मगर दोनों अधिकारियों ने पीछा नहीं छोड़ा।
भीड़ बढ़ती देख एसपी सिटी भांप गए थे छात्रों की मंशा
एएमयू में अवकाश के कारण शुरुआत में बेहद ज्यादा भीड़ नहीं थी। मगर जिस तरह छात्रों की संख्या बढ़ रही थी, तो एसपी सिटी आने वाले समय के हालात को भांप गए। उन्होंने सबसे पहले क्यूआरटी, स्वॉट, आफिस रिजर्व फोर्स और शहर के सभी चौकी इंचार्ज, कोतवाल, देहात के कुछ थाने बुलाए। इसके बाद आरएएफ को भी बुला लिया।