मेघालय टू यूपी, बस नंबर फर्जी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
अपने शहर के विभिन्न रूटों पर दौड़ रही उड़ीसा, कर्नाटक, कोलकाता, आंध्र प्रदेश, पंजाब, मेघालय और नागालैंड नंबरों की निजी बसों की असलियत पर समय-समय पर सवालिया निशान उठता रहता है। दो दिन पहले ट्रैफिक चेकिंग में ऐसी ही एक बस चालक के बस छोड़कर भागने पर ट्रैफिक टीम के कान खड़े हुए तो असलियत सामने आई।
बस मेघालय से नागालैंड और पंजाब होते हुए यूपी के अलीगढ़ में आई। मगर किसी प्रांत से बस बिक्री की एनओसी नहीं जारी हुई। इतना ही नहीं मेघालय परिवहन संभाग ने तो यह भी कह दिया कि ऐसा कोई नंबर उनके यहां से किसी बस को जारी ही नहीं हुआ। यह सुनते ही बस को बन्नादेवी थाने में खड़ा करा दिया गया।
बस के स्थानीय मालिक और पंजाब से बेचने वाले मालिक पर फर्जीवाड़े का संदेह जताते हुए मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है। अब पुलिस टाटा मोटर्स से संपर्क कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस इंजन व चैसिस नंबर की बस किस प्रांत में कब बेची गई थी। ताकि सच्चाई सामने आ सके।
एक सटीक सूचना के आधार पर एसपी यातायात अजीजुल हक ने गैर प्रांतों की इन बसों की हकीकत जानने के लिए ट्रैफिक इंस्पेक्टर अनूप सिंह को लगाया। इसी बीच टीआई अनूप सिंह को अलीगढ़ खैर पलवल मार्ग पर चलने वाली एक निजी बस पर संदेह हुआ। उन्होंने सोमवार दोपहर यह बस शहंशाह तिराहे पर चेकिंग के लिए रुकवाई और जैसे ही बस के चालक से उसके कागजात मांगे तो वह सकपकाने लगा।
कागजों में दर्ज था कि बस सबसे पहले मेघालय में खरीदकर लाई गई। वहां से नागालैंड में बेची गई और वहां से पंजाब, इसके बाद अलीगढ़ में जट्टारी निवासी बस स्वामी ने खरीदी। मगर किसी प्रांत की एनओसी कागजों की फाइल में नहीं थी। इस पर जब टीआई ने मेघालय प्रांत के परिवहन अधिकारियों से संपर्क कर वहां से जानकारी मांगी तो पता चला कि जिस नंबर की बस का अनूप सिंह ने उनसे जिक्र किया है, उस नंबर की कोई बस मेघालय में कभी पंजीकृत ही नहीं हुई। इसलिए वहां से एनओसी जारी होने का मतलब ही नहीं होता।
यह जानकारी मिलते ही जब अनूप सिंह ने सख्त सवाल-जवाब शुरू किए तो बस चालक मौका पाकर वहां से बस छोड़कर भाग गया। इस पर यह समझ में आया कि मेघालय का फर्जी नंबर जेनरेट कर बस को वहां से नागालैंड बिक्री होना दिखाया। इसके बाद बिना एनओसी के ही पंजाब बिक्री होना दिखाया और फिर उसे पंजाब से अलीगढ़ बिक्री होना दिखाकर बिना एनओसी के ही चलाया जा रहा है।
ऐसे में अंदेशा है कि या तो यह बस चोरी की है या फिर किसी कबाड़ आदि मेें खरीदकर कर तैयार की गई है। इस संबंध में कागजों में दर्ज बस के मौजूदा स्वामी और पंजाब से बस को बेचने वाले पर संदेह जताते हुए बन्नादेवी में धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। बन्नादेवी पुलिस अब टाटा मोटर्स से संपर्क कर इसके असली स्वामी का पता लगाएगी।
बन्नादेवी इलाके में पकड़ी गई बस मेघालय में दर्ज नहीं है। इसलिए वहां से एनओसी जारी नहीं हुई। यह बात मेघालय प्रांत से स्पष्ट हो गई है। इससे साफ है कि उसकी चारों बिक्री फर्जी हैं। फिलहाल मुकदमा दर्ज कराया गया है और बस थाने में है। आगे जांच में कार्रवाई होगी। - अजीजुल हक, एसपी यातायात