दुष्कर्म में अभियुक्त को सात साल की कैद
ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त को सात वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है, जबकि इसी मामले में उसके सहयोगी की भूमिका में रही 120 बी की आरोपी पत्नी को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली सासनी में 28 मई 2013 को वादी की ओर से तहरीर दी गई, जिसमें कहा गया था कि रात्रि आठ बजे वादी की पुत्री शौच को गई थी। उसी समय अभियुक्त जीतू वादी की पुत्री की छाती पर तमंचा रखकर उसे अपने कमरे में ले गया। कमरे का दरवाजा अभियुक्त की पत्नी कमलेश देवी ने बंद कर दिया और दरवाजे के बाहर बैठ गई। जब उसकी पत्नी से कड़ाई से पूछा तो उसने कमरे की तरफ इशारा कर दिया। जब मेरे पुत्रों ने दरवाजा खुलवाया तो देखा अभियुक्त उसकी पुत्री से दुष्कर्म कर रहा था। इसके बाद जीतू ने हाथ में तमंचा लेकर पीड़ित के पुत्र को धमकी दी कि अगर रिपोर्ट दर्ज करने गया तो जान से मार दूंगा।
दोनों पक्षों की ओर से विद्वान अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष न्यायालय में रखा, किंतु आरोपी पक्ष एडीजीसी एसएस चौहान द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को झुठलाने में असफल रहा। इसके बाद आरोपी को सात वर्ष की कैद एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी निर्णय दिया है कि अर्थदंड अदा नहीं करने पर अभियुक्त को चार माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। जुर्मना अदा करने पर आठ हजार रुपये पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे। न्यायालय ने आईपीसी की धारा 506 में भी अभियुक्त को दोषी मानते हुए दो वर्ष के कारावास से भी दंडित किया। दोनों सजाओं के साथ-साथ चलने का भी निर्णय दिया है।