न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छ अलीगढ़ के नाम पर गांव गांव स्वच्छता का संदेश देने वाले इन अफसरों की नाक के नीचे टायलेटों में इस कदर गंदगी है कि वहां मूत्र विसर्जन अथवा शौच निवृत्ति किसी जंग से कम नहीं है।
कलक्ट्रेट एवं विकास भवन में टायलेट जाने पर नाक पर रुमाल रखना मानो पहली शर्त हो। ओडीएफ, सीएलटीएस एवं स्वच्छ शौचालय निर्माण में जनता की गाढ़ी कमाई का करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाने वाले इन अफसरों ने तो विकास भवन में बतौर माडल बनाए गए इज्जत घर टायलेट की भी इज्जत नहीं रखी।
वहां भी भीषण गंदगी का साम्राज्य है। यानि कि इज्जत घर की इज्जत भी तार-तार कर दी गई है। यह तो स्वच्छ भारत मिशन को कामयाब बनाने वाले दो बड़े विभागाें का हाल है। अन्य विभागों में टायलेटों में सफाई की कल्पना भी व्यर्थ है। अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो इस कड़वी हकीकत से रूबरू होना पड़ा।
स्वच्छ भारत मिशन की स्थिति
- ओडीएफ-341 ग्राम पंचायतें, जागरूकता अभियान में बहाए लाखों
- इस वित्तीय वर्ष में दो अक्तूबर तक शौचालय निर्माण का लक्ष्य-दो लाख
- अब तक बन सके हैं 70 करोड़ की लागत से 72173 शौचालय