न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिला उद्योग एवं उद्यमिता प्रोत्साहन केंद्र में 20 हजार रिश्वत प्रकरण की जांच खटाई में पड़ गई है। इस मामले की अब नए सिरे से जांच होगी।
केंद्र के संयुक्त आयुक्त सुधांशु तिवारी ने इस चर्चित मामले की जांच के लिए विभाग के ही सहायक आयुक्त दुष्यंत कुमार को नियुक्त किया था, लेकिन दुष्यंत कुमार ने जांच करने में असमर्थता जता दी।
जानकारों की मानें तो उन्होंने विभागीय मामला होने का हवाला देकर दूसरे विभाग के अधिकारी से जांच कराने का आग्रह किया, ताकि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके। इसी बीच संयुक्त आयुक्त उद्योग सुधांशु तिवारी स्थानांतरित होकर दूसरे शहर में चले गए हैं।
केंद्र के नवनियुक्त उपायुक्त उद्योग एसएन पासवान ने कहा कि वह उनके आने के पहले की घटना है। हालांकि वह इस मामले की जांच दोबारा करवाएंगे। अब विभाग में कभी ऐसी शिकायत सुनने को नहीं मिलेगी। इस मामले में मनोज राजौरिया नामक बाबू रिश्वत प्रकरण से संबंधित वीडियो वायरल होने के बाद से निलंबित है।
उल्लेखनीय है कि जिला उद्योग एवं उद्यमिता प्रोत्साहन केंद्र के बाबू मनोज राजौरिया का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हुआ था।
बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह की शिकायत के बाद विभाग द्वारा आरोपी बाबू को निलंबित कर दिया गया है। वीडियो में दो अन्य कर्मचारियों को भी 100-100 रुपये लेते हुए दिखाया गया है।
कमेटी इसकी भी जांच करेगी। बाबू ने वीडियो में 17 हजार रुपये संयुक्त आयुक्त सुधांशु तिवारी को देने की बात कही है। बाबू ने उद्यमी इकराम खां से स्टांप शुल्क में छूट दिलाने के नाम पर 20 हजार रुपये रिश्वत के रूप में वसूले थे।