न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जनप्रतिनिधियों को इस वित्तीय वर्ष में दिये हैंडपंपों की संख्या में कटौती कर दी गई है। विधायक एवं एमएलसी को 100-100 हैंडपंप अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में आवश्यकता के अनुसार लगाने को देने की घोषणा करने वाली सरकार ने पूरे वित्तीय वर्ष में दिये हैं मात्र 16-16 हैंडपंप। इन्हें लगाने का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।
सूबे का निजाम संभालने के साथ ही योगी सरकार ने प्रदेश में व्याप्त पेयजल समस्या के प्रभावी निदान की घोषणा की थी। इस योजना के तहत सभी विधानसभा और विधान परिषद सदस्यों को 100-100 हैंडपंप दिये जाने की घोषणा की गई थी।
ताकि गर्मियों में आने वाली पेयजल समस्या का निदान कराया जा सके, लेकिन पूरे वर्ष में योजना पर अमल न करने के बाद हाल ही में सरकार ने विधायकों से आए प्रस्तावों के मुताबिक टेंडरिंग प्रक्रिया पूर्ण करायी है।
इसके बाद 112 हैंडपंपों का पैसा रिलीज किया है। जिले में सात विधायकों में स्वीकृत हैंडपंपों को विभक्त करें तो हर विधायक के खाते में 16-16 हैंडपंप आ रहे हैं।
इनके लिए शासन की ओर से प्रति हैंडपंप 45 हजार रुपये के हिसाब से 50.27 लाख का बजट रिलीज किया गया है। विधानपरिषद सदस्यों की हालत तो और भी खस्ता है।
जिले के तीन एमएलसी के लिए मात्र 29 हैंडपंप स्वीकृत किए गए हैं। यानी कि करीब नौ-नौ हैंडपंप प्रत्येक एमएलसी के खाते में आएगा। इसके लिए 13.14 लाख रुपये का बजट दिया गया है।
मुख्य विकास अधिकारी दिनेश चंद्र ने स्वीकार किया कि विधायकों के लिए 112 हैंडपंप एवं एमएलसी के लिए 29 हैंडपंपों का पैसा आ गया है। कार्यदायी संस्था का दायित्व यूपी एग्रो को दिया गया है।