फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ में 450 से ज्यादा जिंदगी खा जाती हैं खूनी सड़कें

विज्ञापन
विज्ञापन
450 से ज्यादा जिंदगी खा जाती हैं खूनी सड़कें
विज्ञापन

ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

कुछ तो सड़कों पर असुरक्षित स्थितियां और कुछ लोगों की अपनी लापरवाही। इन दोनों ही वजहों से करीब 450 (स्रोत सीएमओ आफिस में रखा पोस्टमार्टम का रजिस्टर) से ज्यादा परिवार प्रत्येक वर्ष अपनों को खो देते हैं। इसके अलावा व्यवस्था में लगे जिन लोगों को सड़कों पर सुरक्षा की स्थितियों और मानकों को लागू करने का काम करना चाहिए वह सिर्फ वसूली और सिर्फ वसूली में लगे रहते हैं। इसी हालत के चलते हादसों में इजाफा हुआ है।

यह देखा गया है कि कई तरह के अभियान चलाने के बाद भी अभी भी लोग ट्रैफिक नियमों और सुरक्षा को लेकर लापरवाही भरा रवैया ही अपनाते हैं। अधिकांश दो पहिया वाहन चालक हेलमेट का पालन नहीं कर रहे हैं, जबकि आंकड़े बताते हैं कि हेलमेट पहनने से हेड इंजरी की संभावना कम हो जाती है। इससे निश्चित तौर पर जान जाने वाले मामलों में कमी आएगी। उड़ान सोसायटी ने वाहन चालकों के व्यवहार पर एक अध्ययन किया, जिसमेें कुछ तथ्य निकल कर आए।
विज्ञापन


कुछ यह वजह हैं हादसों की
अधिकांश हादसे तब होते हैं जब यह वाहन चालक मान लेता है कि वह सबसे सुरक्षित तरीके से वाहन चला रहा है।
बड़े वाहनों के चालकों को कभी कभी लंबे ड्राइव के बाद झपकी सी आने लगती है, लेकिन वह फिर भी वाहन चलाते रहते हैं।
मोड़ पर सतर्कता में कमी होती है। साथ ही लोडर वाहनों को यात्री वाहनों की तरह इस्तेमाल करने पर समस्या होती है। बौनेर के हादसे में भी यह एक बड़ी वजह थी।
कुछ वाहनों की फिटनेस को लेकर हमेशा समस्या है। वह वाहन जो अन्य राज्यों में कंडम घोषित हो चुके हैं, यहां पर धड़ल्ले से चल रहे हैं।

पिछले पांच वर्ष में 10 फीसदी तक सड़क हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है
वर्ष हादसों की संख्या
2012- 398
2013- 408
2014- 411
2015--423
2016--433
2017--450 (अब तक)

पांच साल में बढ़े जिले में ढाई लाख वाहन
पिछले पांच वर्षों में ही अलीगढ़ जिले में ढाई लाख से अधिक वाहनों का इजाफा हो चुका है। यह संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़े हैं। यहां पर प्रत्येक वर्ष 50 हजार वाहनों का पंजीकरण हो रहा है। इसमें वह वाहन शामिल नहीं हैं जो बाहर से आते हैं और खरीदे जाते हैं। पहले से मौजूद वाहन भी सड़कों पर हैं। प्रत्येक वर्ष लगातार बढ़ रहे वाहन और वही सीमित सड़कें कम से कम शहरी इलाके में तो एक बड़ी समस्या पैदा करती ही हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
यूरोपीय देशों के मुकाबले हमारे यहां वाहनों में सुरक्षा मानकों को लेकर हमारी प्राथमिकता बहुत कम है। एयरबैग अभी भी अधिकांश लोगों के लिए गैर जरूरी चीज है। लोगों की प्राथमिकता कम कीमत की कारों की है। इसके अलावा ट्रैक्टर, ट्रक, लोडर आदि को यात्री वाहनों की तरह इस्तेमाल करना भी गलत प्रवृत्ति है। हादसा होने पर इस तरह के वाहनों में जान जाने की संभावना अधिक रहती है। - नारायण सरीन, ऑटो एक्सपर्ट
विज्ञापन

जो यात्री वाहन नहीं है और उनमें यात्री ढोए जा रहे हैं, ऐसे वाहनों पर कार्रवाई और सीज करनें की जिम्मेदारी पुलिस की है। टेंपो की छत के ऊपर बैठकर यात्रा करना, टेंपो में ओवर लोडिंग करना यहां पर आम बात है। हैरत यह है कि इन पर कार्रवाई की जगह इन्हें चलने दिया जा रहा है। - राम कृष्ण तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें