अगर किसी साहीवाल गाय को साहीवाल का ही सीमन दिया जाए तो 100 फीसदी प्योर नस्ल का जन्म होता है। अगर जर्सी या अन्य देसी गाय को दिया जाए तो लगभग 70 फीसदी लक्षण वाली साहीवाल बछिया जन्म लेती है, जो भरपूर दूध देती है।
बरला के गांव भवीगढ़, कोरह और सूरजपुर के गोपालक इन दिनों काफी खुश हैं। कारण ये है कि इन गांवों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए शार्टेड सीमन दिए जाने से साहीवाल नस्ल की बछिया पैदा हो रहीं हैं। तीनों गांव की 116 गायों ने अब तक 122 साहीवाल बछियों को जन्म दिया है।
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इन गांवों में मार्च 2024 में शार्टेड सीमन देने का कार्य शुरु हुआ था। इसमें तीनों गावों की 300 गायों का चरणबद्ध तरीके से कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। इन सभी को साहीवाल नस्ल का सीमन दिया गया। इसमें 219 गायों ने गर्भधारण किया। अब तक 116 गायों ने 122 बछियों को जन्म दिया है। भवीगढ़ निवासी जय शर्मा, नितिन व श्यामसुंदर के यहां जुड़वा बछिया पैदा हुई हैं।
भवीगढ़ के पशु चिकित्सालय की डॉ. वर्षा सिंह ने बताया कि अगर किसी साहीवाल गाय को साहीवाल का ही सीमन दिया जाए तो 100 फीसदी प्योर नस्ल का जन्म होता है। अगर जर्सी या अन्य देसी गाय को दिया जाए तो लगभग 70 फीसदी लक्षण वाली साहीवाल बछिया जन्म लेती है, जो भरपूर दूध देती है। यह एक अच्छी शुरुआत है।
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साहीवाल रोजाना देती है 16 लीटर दूध
साहीवाल गाय के दूध में उच्च गुणवत्ता का लाभदायक फैट पाया जाता है। एक साहीवाल गाय आमतौर पर रोजाना 10 से 16 लीटर तक दूध देती है। दुधारू देसी गायों में साहीवाल देश की सर्वश्रेष्ठ प्रजाति मानी जाती है। यह गाय मुख्य रूप से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पाई जाती है।
मेरी जर्सी गाय पिछली बार दस किलो दूध दे रही थी। कृत्रिम गर्भाधान से 15 दिन पहले उसने जुड़वा साहीवाल बछियों को जन्म दिया है। इसके बाद से एक किलो दूध बढ़ गया है।-श्याम सुंदर, भवीगढ़।
मेरी जर्सी गाय ने कृत्रिम गर्भाधान से इस बार जुड़वा साहीवाल बछियों को जन्म दिया है। पिछली बार यह गाय सात किलो दूध रोजाना दे रही थी, अब नौ किलो दूध दे रही है, दो किलो की बढ़त हुई है।-जय शर्मा, भवीगढ़।