विद्यालय संचालकों को नहीं है छात्रवृत्ति की चिंता
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
शासन ने सत्र शुरू होने से पहले ही विद्यालय संचालकों को सख्त चेतावनी दी थी कि यदि उनकी कमी की वजह से किसी भी विद्यार्थी की छात्रवृत्ति रुकी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी से लेकर समाज कल्याण अधिकारी तक ने समय-समय पर बैठकें बुलाकर संचालकों को चेताया है। बावजूद इसके संचालकों पर कोई असर नहीं है।
कम से कम छात्रवृत्ति के लिए जरूरी कोर्स व फीस का डाटा लॉक करने के आंकड़े तो यही हकीकत बयां करते हैं। अब तक जिले के 70 फीसदी इंटर कॉलेजों ने अपने यहां पढ़ाए जाने वाले कोर्स और फीस का डाटा डिजीटल हस्ताक्षरों से लॉक कर समाज कल्याण विभाग के पास नहीं भेजा है।
तमाम नोटिसों के बावजूद कई विद्यालयों ने तो जवाब तक नहीं दिया है तो कई ने गोल मोल जवाब देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान ली है। बताते चलें कि सभी इंटरमीडिएट तक के विद्यालयों को 15 जुलाई तक हर सूरत में डाटा भेजना था, जबकि डिग्री कॉलेजों के लिए समय सीमा 20 जुलाई रखी गई
है। जिला समाज कल्याण अधिकारी नगेंद्र पाल सिंह ने स्वीकार किया कि 70 फीसदी कॉलेजों ने कोर्स व फीस का डाटा लॉक नहीं कराया है।
छात्रवृत्ति आवेदनों पर असर
कॉलेजों द्वारा डाटा लॉक न कराने से छात्रवृत्ति आवेदनों पर असर पड़ रहा है। एक जुलाई से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया में विद्यार्थी धड़ाधड़ आवेदन कर रहे हैं, लेकिन कॉलेज का डाटा न आने के कारण इनके आवेदन स्वीकार नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में त्रुटि होने अथवा गलती से नाम छूटने पर संबंधित छात्र अथवा छात्रा की छात्रवृत्ति रुकनी तय है।
पिछले साल भी मारी गई थी 86 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति
अलीगढ़। वित्तीय वर्ष 2016-17 में लापरवाही के चलते राधा गोविंद महाविद्यालय हीरापुर गोपी अकराबाद के बीटीसी संकाय के 86 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति मारी गई थी। इस मामले में कालेज प्रशासन ने मास्टर डाटा अपलोड नहीं किया था।