दूसरे दलों से आने वाले नेताओं की संपत्ति जांच का विषय
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
बसपा एवं सपा नेताओं को भाजपा में शामिल कराने पर पार्टी एवं संघ के अंदर काफी विरोध है। अनुशासन एवं अन्य कारणों से भाजपा के नेता खुलकर नहीं बोल रहे हैं।
आरएसएस के प्रचारक रहे गरुड़ध्वज उपाध्याय ने जरूर इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, ओम माथुर एवं प्रदेश अध्यक्ष तथा संगठन मंत्री को पत्र लिखा है।
पूर्व प्रचारक गरुड़ध्वज उपाध्याय ने देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का उल्लेख करते हुए कहा है कि जो बात सिद्धांत में गलत है, वह व्यवहार में भी उचित नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के बाद कहा था कि काले धन के खिलाफ यह पहला कदम है, अंतिम नहीं। काले धन के खिलाफ दूसरा अभियान बेनामी संपत्तियों के खिलाफ होगा, जिसमें गरीबों के खून पसीने की कमाई का अरबों-खरब रुपये खपा हुआ है।
उन्होंने लिखा है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव एवं उनके परिवार के खिलाफ नीतीश ने जो स्टैंड लिया है, देश की जनता ने उसकी प्रशंसा की है। यह अभियान ब्यूरोक्रेट्स एवं धनाढ्य राजनीतिक परिवारों के खिलाफ निष्पक्ष भाव से चलना चाहिए।
सपा, बसपा, राजद एवं कांग्रेस के खिलाफ चल रहा है तो भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री व उनके परिवार के खिलाफ भी होना चाहिए। कौन नहीं जानता कि सपा-बसपा के जो नेता बीजेपी में आ रहे हैं, राजनीति में आने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति क्या थी। इसी तरह बीजेपी में भी कुछ नेता ऐसे हैं, जिन्होंने राजनीति में आने के बाद अकूत धन संपदा अर्जित की है।
वहीं लोग अपने समान भ्रष्टाचारी नेताओं को पार्टी में लाने का काम कर रहे हैं। ये सघन जांच का विषय है। ई-मेल से भेजे अपने पत्र में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट के कथन का उल्लेख करते हुए कहा है कि राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता।
अगर कुछ होता है तो वह योजनाबद्ध तरीके से ही होता है। अगर कोई चरित्रहीन व्यक्ति को बचा रहा है तो बचाने वाला भी उसके पाप में साझीदार है।