आलू की बदहाली से किसान तबाही की कगार पर
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एक बार फिर किसान आलू की बदहाली से तबाही की कगार पर है। आलू से कोल्ड का भाड़ा तक नहीं निकल रहा है। वहीं, गुल्ली तो फिकने लगी है। कोल्ड स्टोरेज से निकासी नहीं हो रही है।
अभी तक 30 से 35 फीसदी आलू की निकासी हो सकी है। जानकारों की मानें तो इस साल यदि यही हाल रहा तो कम से कम 20 फीसदी आलू फिकने की कगार पर होगा, जो किसानों के लिए बहुत ही चिंता का विषय है।
कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा 110 रुपये पैकेट है। अच्छे आलू की कीमत 200 से 215 रुपये पैकेट के बीच में है। वहीं गुल्ला की कीमत 80 रुपये से 100 रुपये के बीच में है। गुल्ली की खरीद तो होना ही बंद हो गई है। इन कीमतों पर ध्यान दें तो लागत तो दूर आलू इस बार किसानों को कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा भी नहीं छोड़ रहा है।
जानकारों की मानें तो आलू की खपत न होने से इस प्रकार की स्थिति बनी है। उनका कहना है कि अक्टूबर में आलू की बुबाई शुरू हो जाती है। उससे पहले की कोल्ड स्टोरेज स्वामी कोल्ड खाली करने के लिए किसानों पर दबाव डालने लगते हैं।
ऐसे रेटों में किसान स्टोरेज में रखे आलू को लेकर कहां जाए। किसानों का कहना है कि सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं। किसानों ने मांग की है कि आलू से मंडी समिति खत्म हो जाए, तब कहीं थोड़ी सी राहत मिले।
इनके बोल
आलू की खपत कम होने से यह स्थिति बनी हुई है। सरकार यदि अभी भी मिड-डे मील में आलू आवश्यक कर दे तो देश के 1.67 लाख से अधिक विद्यालयों में एक लाख पैकेट की खपत प्रतिदिन बढ़ जाएगी, जिससे स्थिति में सुधार आ सकता है। यदि यही स्थिति रही तो निश्चित ही 20 फीसदी आलू फिकने की कगार पर होगा। - गिर्राज गोदानी, अलीगढ़ कोल्ड स्टोरेज ऑनर्स एसोसिएशन अध्यक्ष।
आलू की स्थित काफी दयनीय बनी हुई है। आलू की खपत बढ़े तो कोल्ड स्टोरेज से आलू की निकासी हो। 80 फीसदी के समकक्ष कोल्ड स्टोरेज में किसानों का आलू भंडारित है, जो आने वाले समय में बहुत समस्या खड़ी कर देने वाला होगा। - एडवोकेट श्रीकांत शर्मा, एसबीआर कोल्ड खैर स्वामी।
आलू की दुर्दशा के लिए केंद्र व प्रदेश दोनों ही सरकार जिम्मेदार हैं। आलू की खरीद के लिए एक भी जनपद में कांटा नहीं चला। सरकार ने जनता के बीच में झूठा प्रचार किया है। किसानों की कर्ज माफी से कोई सुधार नहीं हुआ है। किसानों के लोस की क्षमता अधिक थी, जिसके एवज में कर्ज माफी कम हुई है। - बिजेंद्र सिंह, कांग्रेस के पूर्व सांसद व जिलाध्यक्ष।
आलू की निकासी के लिए आसपास की ज्यादा रेट वाली मंडी देखी जाएंगी। किसी प्रकार आलू को वहां तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अपने स्तर से एक बैठक बुलाने वाला हूं, जिस पर विस्तार से चर्चा हो सके। बड़े किसानों से भी बैठक की जाएगी, ताकि उनके सुझाव लेकर शासन को भेजे जा सकें। - एनके सहानिया, जिला उद्यान अधिकारी।