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नहीं दिखा मुद्दे का असर, ध्रुवीकरण ही आया नजर

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न्यूज डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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कोई कुछ भी कहे, हर बार की तरह इस बार भी मुद्दों को दरकिनार कर मतदान पर ध्रुवीकरण ही हावी दिखाई दिया। सुबह से शहर की मुसलिम बस्तियों के मतदान केंद्रों पर लगी मतदाताओं की कतार और इसी तरह हिंदू आबादी वाले मतदान केंद्रों पर समय परवान चढ़ने के साथ वही नजारा दिखाई देने लगा।

यही वजह रही कि मतदान की शुरुआत ने ही यह दिखा दिया कि इस बार चुनाव में आमने-सामने की टक्कर हो रही है। दोनों तरफ के मतदाताओं की चर्चाओं में भी एक ही बात थी कि अगर हम कमजोर रहे तो उनको लाभ मिल जाएगा। सुबह के वक्त शहर व कोल क्षेत्र में धीमी गति से शुरू हुआ मतदान 10 बजे के बाद एकाएक गति पकड़ गया।
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बेशक टिर्री-टेंपो बंद थे, मगर इसी तर्क के साथ बाइकों से कार्यकर्ता महिला व बुजुर्ग वोटरों को घरों से निकालकर लाने में जुटे थे।

महानगर के शहर व कोल इलाके के मतदान केंद्रों में मुसलिम आबादी के मतदान केंद्रों पर गौर करें तो पुराने शहर के ज्यादातर मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतार लगना शुरू हो गई। कमोबेश यही हाल शहर के दलित आबादी वाले इलाकों का रहा।

मतदान इकतरफा होने की यह खबरें जब शहर के अन्य हिस्सों में और खासकर हिंदू आबादी में पहुंची तो ध्रुवीकरण का शोर मच गया। बस फिर क्या था, मतदान के लिए दोनों ओर से जोर आजमाइश शुरू हो गई। मगर जिस तरह मुसलिम आबादी में वोट पड़ा और मतदान केंद्रों पर भीड़ दिखाई दी।

यह नजारे हिंदू इलाकों में उस प्रतिशत में कम ही दिखाई दिए। कहते हैं कि इस शहर का मिजाज रहा है कि जब जब मतदान होता है तो दोनों ही पक्षों के सामने मुद्दे, समस्याएं, प्रत्याशी आदि सब कमतर हो जाते हैं। बस ध्रुवीकरण हावी हो जाता है। इस बार भी परिणाम कुछ इसी दिशा में दिखाई दे रहे हैं और वोटरों के मिजाज से चुनाव में दो लोगों में आमने-सामने की टक्कर दिखाई दे रही है।

शहर विधानसभा पर गौर करें तो सुबह 5 प्रशित मतदान नौ बजे तक था, मगर 11 बजे यह प्रतिशत सक साथ बढ़कर 23 फीसदी और फिर 35 फीसदी और अंत में बढ़कर 60 फीसदी हो गया।

करना था मतदान धरे रह गए अरमान, प्रत्याशी परेशान
तमाम प्रशासनिक अभियान और कोशिशों के बाद भी मतदाता सूची में नाम गायब होने की शिकायतों ने इस बार चुनाव मैदान में डटे प्रत्याशियों के पसीने छूट रहे हैं। आलम यह रहा कि मतदाता सूची में नाम न होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को मायूसी हाथ लगी।

वह बिना वोट डाले अपने घरों को लौट गए। इसका असर मतदान प्रतिशत पर भी देखने को मिला। घंटों की मेेहनत के बाद भी जब मतदाता सूची में नाम नहीं मिला तो लोग परेशान होकर प्रशासन को कोसने लगी। आईटीआई रोड निवासी महेंद्र ने बताया कि वह बूथ पर अपनी मतदाता पर्ची को लेने के लिए एजेंट के पास गए।

मगर वहां मतदाता सूची में नाम ही नहीं मिला, जबकि इससे पूर्व के चुनावों में वोट करते आए हैं। वहीं, डीएस महाविद्यालय पर बने मतदान केंद्र पर आए अमित अग्रवाल ने बताया कि वह सुबह साढे़ आठ बजे से मतदाता सूची को खंगाल रहे हैं, लेकिन लिस्ट में नाम नहीं है।

इसे लेकर दोनों खेमों के प्रत्याशी व उनके एजेंट मतदान समाप्त होने के बाद यह गणित लगाने में जुटे हैं कि किस इलाके से किसका वोट गायब हुआ है और उसका कितना नुकसान या किसको फायदा मिलेगा।
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वोटिंग की पिच पर जमकर खेलीं महिलाएं और युवा
इस बार के मतदान में भी हर बार की तरह महिलाओं और युवाओं में गजब बा उत्साह दिखाई दिया। सुबह से मतदान केंद्रों पर सर्वाधिक महिलाओं व युवाओं की भीड़ देखी गई। यह लोग कतार तक में लगने से गुरेज नहीं कर रहे थे। घंटों तक कतार में रहने के बाद यह लोग मतदान के बाद संतुष्ट होकर ही बाहर लौट रहे थे। चाहे वह पुराने शहर की पुरानी आबादी के मतदान केंद्र हों या नए शहर के सोसाइटी व अपार्टमेंट वाले इलाके हों। सभी जगह कमोबोश यही हालात थे।
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शहर विस क्षेत्र में कम मतदान भाजपा
और गठबंधन खेमे की चिंता की वजह
सब हेड....
अलीगढ़ लोकसभा के 6 लाख 96 हजार 357 वोट नहीं पड़े
प्वाइंटर
शहर विस में तकरीबन एक लाख 49 हजार 726 वोट नहीं पड़े
शहरी इलाके में कम मतदान को लेकर गुणा गणित में उलझे एजेंट
बाक्स----
कुल मतदान प्रतिशत- 62.95 फीसदी
कुल वोटर- 18 लाख 82 हजार 47 वोट
कुल पड़े वोट- 11 लाख 85 हजार 689 वोट
नहीं डाला वोट- 06 लाख 96 हजार 357 वोट
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स्रोत : वोटर संख्या और मतदान फीसद पर आधारित।
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अलीगढ़। शहर विधानसभा क्षेत्र इस बार मतदान में बाकी चार विधानसभा क्षेत्रों से पीछे रह गया है। मतदान से पूर्व भगवा बिग्रेड को उम्मीद थी कि राष्ट्रवाद के मुद्दे पर उनको सबसे ज्यादा समर्थन शहरी वोटरों से मिलेगा। हार जीत में शहर विधानसभा अहम भूमिका निभाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही चिंता गठबंधन और कांग्रेस सहित दूसरे प्रत्याशियों को भी है। क्याेंकि शहर विधानसभा में हिंदू सवर्ण सहित सात जातियों और मुस्लिम वोटरों की तादाद लाखों में है। इसके बाद भी यहां वोट फीसद कम होना सबके लिए फिक्र की वजह बन गया है। 60 फीसदी वोटों तक सिमटी शहर विधानसभा में इस चुनाव में 3 लाख 74 हजार 313 वोट थे, जिसमें लगभग 2 लाख 24 हजार 587 वोट पड़े हैं। तकरीबन एक लाख 49 हजार 726 वोट नहीं डाले गए। शहरी इलाके में कम वोटिंग को लेकर सभी पार्टियों के बूथवार एजेंट गुणा गणित में लग गए हैं कि आखिर उनके कितने वोट पड़े। गौर हो कि खैर विस क्षेत्र में 62 फीसद, बरौली विस क्षेत्र में 64 फीसद, अतरौली विस क्षेत्र में 64 फीसद, अलीगढ़ विस क्षेत्र में 60 फीसद, कोल विस क्षेत्र में 64 फीसद मतदान हुआ है।
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