फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़... एस्ट्रोटर्फ तोड़ रहा दम, साई सेंटर खत्म

विज्ञापन
विज्ञापन
एस्ट्रो टर्फ तोड़ रहा दम, साई सेंटर खत्म
विज्ञापन


ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से हॉकी के लिए बना एस्ट्रो टर्फ ग्राउंड धूल जमने और लगातार मैच न होने से दम तोड़ता नजर आने लगा है। वहीं, तीन साल से एस्ट्रो टर्फ के नाते एएमयू में चल रहा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) का ट्रेेनिंग सेंटर भी खत्म हो गया।

एएमयू में वर्ष 2014 में साई की देखरेख में कृत्रिम घास (एस्ट्रो टर्फ) मेें जमाया गया। तीन साल के दौरान सिर्फ एक इंटर यूनिवर्सिटी हॉकी टूर्नामेंट व इंटर हॉल टूर्नामेंट इस सिंथेटिक मैदान पर खेला गया है। दिलचस्प ये है कि करोड़ों की लागत से बने सिंथेटिक मैदान पर राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय तो दूर जनपद स्तरीय हॉकी टूर्नामेंट में तक नहीं हुआ है।
विज्ञापन


जब सिंथेटिक मैदान वजूद में आया, तभी साई ने बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी तराशने के लिए ट्रेनिंग सेंटर बना दिया, जो गैर आवासीय था। ट्रेेनिंग में खिलाड़ियों का चयन भी हो गया, लेकिन वह ट्रेनिंग में किन्हीं कारणवश शामिल नहीं हो पाए। आखिरकार, साई को अपना ट्रेनिंग सेंटर वापस लेना पड़ा। खेल विशेषज्ञों की मानें तो धूल जमने और देखरेख के अभाव में एस्ट्रो टर्फ पर खराब हो जाता है।

एस्ट्रो टर्फ में अच्छी हालात में है। एस्ट्रो टर्फ में कोई परेशानी नहीं है। यूनिवर्सिटी ने एक तरफ सीढ़ी बनवा दी है। गंदगी रुक गई है। रोजाना साफ-सफाई हो रही है। लड़के खेलते हैं गंदा तो होगा ही। खिलाड़ी के शूज थोड़ा-बहुत धूल अंदर ले आते हैं। - डॉ. अरशद महमूद, असिस्टेंट डायरेक्टर, फिजिकल एजूकेशन एएमयू

धूल की बात जहां तक है, बराबर में निर्माण कार्य चल रहा है। पैसा आवंटित हो गया है। इसे कवर्ड कराया जाएगा। इसके बाद धूल का आना बंद हो जाएगा। सेंटर के बाबत साई से बात चल रही है। जो कमियां हैं, उसे पूरा किया जाएगा। दोबारा सेंटर लेने की कोशिश होगी। - प्रो. अमजद रिजवी, सचिव, गेम्स कमेटी एएमयू
विज्ञापन


दो महीने पहले साई सेंटर वापस ले लिया है। इस साल अगर अच्छे खिलाड़ी मिल जाएंगे तो दोबारा ट्रेनिंग शुरू करेंगे। खिलाड़ी न मिलने पाने की सूरत में ट्रेनिंग बंद हो जाएगा। तीन साल से यह ट्रेनिंग चल रहा था। 19 खिलाड़ी चुने गए थे। कुछ बच्चों ने मेडिकल नहीं कराया और ज्वाइन नहीं किया। सेंटर से रिजल्ट नहीं तो सरकार पैसे खर्च नहीं करेगी। खिलाड़ियों को मानदेय और किट देते हैं। साथ ही उन्हें प्लेटफार्म मुहैया कराते हैं। - राजेंद्र सिंह, क्षेत्रीय निदेशक, साई उत्तर प्रदेश
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें