जम्मू कश्मीर के अखनूर में बस हादसे में शिवखोड़ी जा रहे 11 तीर्थयात्रियों के शव शनिवार की देर शाम गांव नाया पहुंचते ही हर तरफ करुण कंद्रन मच गया। अपनों के शव देखकर परिजन बिलख पड़े। महिलाओं का रोकर बुरा हाल था। कुछ महिलाएं गश खाकर धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ीं। बच्चे भी बिलख रहे थे। कोई किसी को संभालने की कोशिश करता तो खुद ही दहाड़ मारकर रो पड़ता।
रात आठ बजकर 40 मिनट पर सबसे पहले सुनीता पत्नी रवेंद्र सिंह के शव को उनके बेटे पवन कुमार ने मुखाग्नि दी। इसके बाद संजय पुत्र सुंदर सिंह की चिता को सबसे पहले उनके बेटे आदित्य ने मुखाग्नि दी। इसके बाद करीब सवा नौ बजे तक सभी 11 शवों को उनके परिजन की ओर से मुखाग्नि दे दी गई थी। एक ओर चिताएं जल रही थीं, दूसरी ओर मासूम बच्चों और बूढ़े माता-पिता के अरमान भी चिता की लपटों सहित जले जा रहे थे।
सुनीता का शव घर पहुंचा तो हादसे के समय बस में उनके साथ मौजूद रहे बुरी तरह से घायल दामाद सुभाष निवासी रामपुर उमरी जिला मथुरा और धेवते राज कुंतल की आंखों से भी आंसुओं का सैलाब बह चला। संजय के घर पर उनकी मां केला देवी का बुरा हाल था। उनके मासूम बेटे आदित्य (10) और ईशान (8) का भी रोकर बुरा हाल था।
सोनू उर्फ अंजली की बूढ़ी मां अपनी बेटी के शव को देखकर बिलखते हुए कभी जमीन पर गिर पड़ती तो कभी दहाड़ मारकर रोने लगती। अंजली का मासूम बेटा शनिवार को शाम से ही घर पर अपनी नानी की गोद में सहमा बैठा था। उसने भी जब अपनी मां के शव को देखा तो अपने आंसुओं की धारा रोक नहीं सका।
यही हाल लक्ष्मण प्रसाद शर्मा और सुरेश के परिवार वालों का भी था। लक्ष्मण प्रसाद शर्मा सहित उनका पूरा परिवार इस हादसे की भेंट चढ़ चुका है। उनके भाई-भतीजों सहित परिवार की महिलाएं बार-बार चारों के शव देखतीं और चीखतीं-चिल्लातीं। लक्ष्मण प्रसाद के मासूम बच्चों अन्नू और नैना के ताबूत को खोलकर उनके चेहरों पर हाथ फेरते हुए एक बार उठकर खड़े हो जाने के लिए कहतीं और फिर गश खाकर धड़ाम से जमीन पर गिर पड़तीं।
दंपती व उनके बच्चों के साथ एक साथ जले
नाया गांव निवासी लक्ष्मण प्रसाद शर्मा, उनकी पत्नी अनामिका उर्फ अन्नू, बेटा रुद्र उर्फ यश और बेटी नैना के शव एक साथ एक ही चिता पर सजाए गए। उनकी चिता को लक्ष्मण प्रसाद शर्मा के भतीजे योगेंद्र कौशिक पुत्र डालचंद्र शर्मा ने मुखाग्नि दी। एक साथ चारों के शव जलते देखकर परिजन ही नहीं गांव वाले भी अपने आंसू नहीं रोक सके। प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और पुलिस कर्मी भी इस दृश्य को देखकर द्रवित थे।
बाबा-नाती के शव भी एक साथ जले
नाया गांव निवासी सुरेश और उनके नाती तनुज के शव को भी एक ही चिता में मुखाग्नि दी गई। सुरेश के पुत्र राजा उर्फ राजेंद्र सिंह ने चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजन चिता से दूर खड़े होकर रो रहे थे। रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें संभालते हुए विधाता की होनी बताकर सांत्वना देने की कोशिश कर रहे थे।
नाया गांव में अंतिम संस्कार में यह रहे मौजूद
- प्रदेश सरकार के गन्ना मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी, बेसिक शिक्षाराज्यमंत्री संदीप सिंह, राजस्व राज्यमंत्री अनूप प्रधान, सांसद सतीश गौतम, पूर्व मंत्री जयवीर सिंह, इगलास विधायक राजकुमार सहयोगी, एमएलसी चौ. ऋषिपाल सिंह, अरविंद दिलेर, डीएम विशाख जी, एडीएम वित्त एवं राजस्व मीनू राणा, एडीएम प्रशासन पंकज कुमार, एडीएम न्यायिक अखिलेश कुमार यादव, एसपी देहात पलास बंसल भी अंतिम संस्कार के समय नाया गांव में मौजूद रहे। वहीं जनपद के विभिन्न थानों से कई इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, महिला आरक्षी, दमकल भी गांव में मौजूद रही। इसके अलावा अलीगढ़-मथुरा रोड से मुरसान मोड़, गंगागढ़ी में नाया मोड़, बेसवां तिराहा में फोर्स रहा। इगलास में भी फोर्स सड़कों पर तैनात रहा।