क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के पूर्व मीडिया सलाहकार व पत्रकार डॉ. जसीम मोहम्मद के खिलाफ छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी ने थाना सिविल लाइंस में तहरीर दी है। उधर, एएमयू प्रशासन ने हाथापाई की घटना से इंकार किया है।
नदीम अंसारी ने बताया कि जसीम ने झूठा आरोप लगाया है। 9 जुलाई को जसीम मोहम्मद ने पीआरओ आफिस से लौटते समय पीछा करने व जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप नदीम अंसारी पर लगाया था।
इस संबंध में उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय में जसीम मोहम्मद घटना प्रकरण के संबंध में जनसंपर्क कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जसीम मोहम्मद से नदीम अंसारी का वाद-विवाद तो हुआ था, लेकिन न तो युवकों के पास कोई हथियार देखा गया और न ही कार्यालय परिसर में किसी तरह की हाथापाई की घटना हुई।
छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि जसीम मोहम्मद अब दल बदलने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। एक साजिश के तहत यूनिवर्सिटी में घुसकर गंगा-जमुनी तहजीब छिन्न-भिन्न की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी को प्रॉक्टर द्वारा नोटिस देना जायज नहीं। वह इसके खिलाफ हैं। षड्यंत्रकारी जसीम का कैंपस में प्रवेश बंद होना चाहिए। एएमयू बिरादरी इस व्यक्ति को बायकॉट करती है।
छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि जसीम मोहम्मद ने जो इल्जाम लगाया है कि उन्हें पीआरओ आफिस में जो पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष नदीम अंसारी ने जानलेवा हमला किया था, वह अफवाह है।
इसमें कोई शक नहीं है कि जसीम मोहम्मद हमेशा से एएमयू के खिलाफ षड्यंत्र रचते रहे हैं। इसमें एएमयू में आरएसएस की शाखा और कुलपति का इस्तीफा मांगना और इसके अलावा बहुत कुछ है। वह नदीम अंसारी के साथ हैं।
छात्रसंघ के कैबिनेट मेंबर फरहान जुबैरी ने कहा कि जसीम मोहम्मद पहले कांग्रेस की सरकार में कांग्रेस की दलाली करते थे अब भाजपा की सरकार में। जसीम अपना जमीन बेचकर भाजपा की दलाली करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले में जो नोटिस नदीम अंसारी को दिया गया है, वह नोटिस उन्हें नहीं बल्कि 28 हजार स्टूडेंट को दिया गया है। निखिल शर्मा ने कहा कि जसीम मोहम्मद जो खुद को मोदी भक्त बोल रहे हैं, 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ सुप्रीम कोट में पीआईएल दायर करके भाजपा को प्रतिबंधित करने की मांग क्यों की थी।