न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्कूली बच्चों को राहत देने के लिए प्रशासन ने किताबों के साथ जबरन स्टेशनरी लेने को बाध्य करने पर रोक लगा दी है। सभी किताब विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि इस आदेश का अक्षरक्ष पालन किया जाए। स्कूलों का नाम लिखी कापियों को लेने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। संचालकों को निदेर्शित किया गया है कि यदि वे अपना प्रचार करने के लिए कापियों के कवर पर यदि अपना नाम लिखवाते हैं तो इसका अतिरिक्त शुल्क न लें।
स्कूल संचालक, बुक सेलर, अभिभावक एवं एबीवीपी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करते हुए एडीएम सिटी एसबी सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई बच्चा स्कूल का नाम लिखी कापी नहीं लेना चाहता है तो उसे बाध्य न किया जाए।
इस मौके पर यूपी बोर्ड की किताबों के साथ गाइड लेने की बाध्यता करने वाले प्रकाशकों की जांच के आदेश डीआईओएस को दिए गए हैं। एबीवीपी के नेताओं ने समस्या रखी कि यूपी बोर्ड की कुछ किताबें ऐसी हैं जिनकी कीमत विभिन्न जनपदों में भिन्न है। जहां ज्यादा कमीशन है वहां कीमत ज्यादा है और जहां कम कमीशन है वहां कीमत कम है।
एडीएम ने डीआईओएस को विभिन्न जनपदों से अमुक किताबाें के रेट लेकर यदि अनियमितता पाई जाए तो कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। एक समस्या यह भी उठी कि कई स्कूलों में कुछ ऐसी किताबें हैं जो साल भर नहीं पढ़ाई जाती। इस मामले में स्कूल संचालकों से अपने कोर्स की समीक्षा करने को कहा गया। यह भी निर्देश दिए गए कि यदि साल भर न पढ़ाई जाने वाली किताबें अनावश्यक लगें तो उन्हें हटा दिया जाए।