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UP Election 2022 : अखिलेश यादव से ट्विटर पर भूल हुई या जानबूझकर नई चाल चली, पढ़िए कैसे लोगों ने ट्रोल किया?

Sat, 27 Nov 2021 03:00 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव हैं। शनिवार को उनके एक ट्विट पर नया विवाद शुरू हो गया। बड़ी संख्या में यूजर्स उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। 
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अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ट्विटर पर ट्रोल हो रहे हैं। शनिवार को वह कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार को घेरने के चक्कर में खुद घिर गए। उन्होंने प्रयागराज के फाफामऊ में दलित के घर हुई चार हत्याओं का मामला ट्विटर पर उठाया। हालांकि, उन्होंने अपने ट्विट में जिले का नाम प्रयागराज लिखने की बजाय इलाहाबाद लिखा। इसी को लेकर सोशल मीडिया के यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।  
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अखिलेश यादव ने लिखा- 'इलाहाबाद के फाफामऊ में दबंगों के द्वारा 4 दलितों की हत्या दलित विरोधी भाजपा सरकार पर एक और बदनुमा दाग है। घोर निंदनीय! उम्मीद है ये अपराधी बिना चश्मे के भी दिख जाएंगे...'

यूजर्य ने कहा- प्रयागराज बोलो भइया
प्रयागराज की बजाय इलाहाबाद लिखने पर यूजर्स ने जमकर अखिलेश यादव को ट्रोल किया। विक्रम तिवारी नाम के यूजर ने लिखा- 'भाई, इलाहाबाद नहीं , प्रयागराज कहो। और अपराधी सपा के ही होते हैं। गेस्ट हाउस कांड याद है? एक दलित महिला के कनपटी पर रिवाल्वर रखकर उसके चीर हरण दुशासन के चेलों ने किया था। जिसे एक भाजपा नेता ने बचाया था।'
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विक्रम साहू नाम के यूजर ने लिखा- 'जो इंसान up का मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहा है उसको अभी तक इतना ज्ञान नही है कि "इलाहाबाद" का नाम (प्रयागराज) है।' 

राष्ट्रवादी राठौर नाम के यूजर ने लिखा- 'इलाहाबाद की नहीं प्रयागराज की घटना है महोदय। सबके नाम बदल कर बोलते हो आप इसलिए आज कल सब आपको अलग नाम से बुलाते हैं। शुरुरात आपने ही कि थी और दबंग कौन, ठाकुर ,पण्डित, बनिया आखिर कौन ??? लेकिन दलित शब्द कहा से आया, ये बोलिये 4 लोगो की हत्या इसलिये चुनाव हार रहे हैं इकतरफा होकर। 
   
   
 
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जिन्ना पर हुआ था विवाद

अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
पिछले दिनों सरदार पटेल की 146वीं जयंती पर अखिलेश यादव ने पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का जिक्र किया था। अखिलेश यादव ने कहा था, 'सरदार पटेल, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना ने एक ही संस्थान से पढ़ाई की और बैरिस्टर बने। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में मदद की और संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटे। इस बयान को लेकर अखिलेश यादव लंबे समय से भाजपा के निशाने पर हैं। 

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा था, "समाजवादी पार्टी प्रमुख ने जिन्ना की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल से की। यह शर्मनाक है। यह तालिबानी मानसिकता है जो देश को बांटने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोया है।'

भूल हुई या नई चाल? 
जिन्ना के बाद प्रयागराज को इलाहाबाद लिखकर अखिलेश यादव फिर से चर्चा में हैं। सवाल उठ रहा है कि अखिलेश यादव ने ये भूल से लिख दिया है या जानबूझकर इलाहाबाद लिखा है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव कहते हैं, 'ये पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने इस तरह के बयान दिए हों। वह उन तमाम नामों का विरोध करते आए हैं, जिसे योगी सरकार में बदला गया है। इस वक्त भी प्रयागराज को इलाहाबाद लिखकर एक खास वर्ग का वोट पाने की चाल हो सकती है।'
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