जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर आमने-सामने भले ही भाजपा के प्रबल प्रताप और चौधरी यशपाल हों, लेकिन इसे दो सांसदों के वर्चस्व की जंग के तौर भी देखा जा रहा था। बताया जा रहा है कि प्रबल प्रताप को इटावा के सांसद व एससी आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामशंकर कठेरिया और चौधरी यशपाल को आगरा से सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल का समर्थन था। विपक्ष के सामने कठेरिया की रणनीति की सफलता ही बताई जा रही है।
अविश्वास प्रस्ताव पास न होने में पूर्व सांसद चौधरी बाबूलाल की भी अहम भूमिका रही। दरअसल, उनके पुत्र राकेश चौधरी जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्होंने अपने पुत्र को बैठक से ही दूर रखा।
सपा ने किया भाजपा का ‘समर्थन’
लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन कर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक में भाजपा के पक्ष में दिखी। अविश्वास प्रस्ताव पर सपा की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव ने अपने कुछ समर्थक सदस्यों के साथ भाजपा के ही दूसरे खेमे का साथ दिया।
संगठन ने इस पूरे मामले से दूरी बना ली है। ब्रजक्षेत्र संगठन महामंत्री भवानी सिंह का कहना है कि इस चुनाव से पार्टी का कोई लेनादेना नहीं। ये व्यक्तिगत प्रयास होंगे। वे दोनों भले ही भाजपा से जुड़े हों लेकिन पार्टी की नीति है कि वह ऐसे चुनाव में भाग नहीं लेती।
हमारे कई सदस्यों को पुलिस-प्रशासन ने बैठक में नहीं पहुंचने दिया। उन्हें काफी पहले रोक दिया गया। हम दूसरी बैठक बुलाने के लिए आवेदन करेंगे और इसमें अविश्वास प्रस्ताव पास कराएंगे। हमारे पास पर्याप्त सदस्यों का समर्थन है।- चौधरी यशपाल, जिला पंचायत सदस्य (अविश्वास प्रस्ताव के नेतृत्वकर्ता)