आगरा। मोबाइल की स्क्रीन पर उंगलियों की तेज रफ्तार, व्हाट्सएप नोटिफिकेशन की घंटी, इंस्टाग्राम, फेसबुक पर नए रील्स और अब एआई के चैटबॉट्स। यही है आज के युवाओं की नई दुनिया। पढ़ाई से लेकर कॅरिअर प्लानिंग और रिश्तों तक, हर कदम पर डिजिटल ट्रेंड्स। एआई ने यह काम आसान किया है। ऑनलाइन गेमिंग ने मनोरंजन को नए आयाम दिए हैं। लेकिन इस चमक के पीछे छिपा है स्क्रीन एडिक्शन, सोशल मीडिया प्रेशर, साइबर क्राइम और रियल लाइफ इंटरेक्शन की कमी जैसी चुनौतियों का साया।
डिजिटल युग का यह युवा जहां अनगिनत संभावनाओं से घिरा है, वहीं उसे संतुलन बनाकर चलने की सबसे बड़ी परीक्षा भी देनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग युवाओं के लिए अवसरों के दरवाजे खोल सकता है, मगर इसकी बढ़ती लत युवाओं की कॅरिअर में तेजी की रफ्तार पर रोक भी लगा रही है।
डिजिटल युग के जो युवा है उनको स्क्रीन टाइम की लत इस कदर लग गई है कि उनके सपने स्क्रीन तक सिमट तक रह गए हैं। अत्यधिक स्क्रीन टाइम उनके कॅरिअर को दिखावे में कैद कर रहा है। आत्मविश्वास और व्यवहार पर भी असर डाल रहा है।
स्क्रीन टाइम बढ़ना अच्छा नहीं
युवाओं का स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। यह अच्छा संदेश नहीं है। मनोविज्ञान में कहा जाता है कि जो आप देखेंगे वहीं आप बनेंगे। ऐसे में रील की दुनिया गलत प्रभाव छोड़ रही है। - डॉ. पूनम तिवारी, मनोवैज्ञानिक
सोशल मीडिया से भटकता है ध्यान
सोशल मीडिया का आकर्षण पढ़ाई और कॅरिअर से ध्यान भटका देता है। असली सफलता किताबों और मेहनत में है। ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री भी सफलता देती है लेकिन इसकी लत नहीं लगनी चाहिए। - प्रथम शर्मा, छात्र
स्क्रीन पर फिसल रहा समय
युवाओं का समय सबसे कीमती है, और वह स्क्रीन पर फिसल रहा है। अगर हम लक्ष्य के लिए समय नहीं निकालेंगे, तो पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचेगा। डिजिटल युग के साथ हकीकत में भी देखें और बेहतर नतीजों की ओर भागें। - द्राक्षा दुबे, छात्र
शारीरिक व मानसिक कमजोरी
मोबाइल मनोरंजन का जरिया है, पर खेल के मैदान से दूरी हमें शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना रही है। शरीर को पसीने की जरूरत है, सिर्फ स्क्रॉलिंग की नहीं। - विभोर, छात्र
युवाओं का है दिन
दुनिया के सबसे बड़ी जनशक्ति वाले वर्ग युवाओं का आज दिन है। जिसे अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस कहा जाता है। इसे स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे 1985 में राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया था। आगामी वर्षों के बाद 1999 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की घोषणा के बाद यह सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय रूप में वर्ष 2000 में मनाया गया।