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टीचर्स डेः इन चिरागों ने दिया गरीब बच्चों को शिक्षा का उजाला

Tue, 05 Sep 2017 05:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
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पाठशाला - फोटो : अमर उजाला
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दुनिया को रोशनी देने वाले चिराग के तले में अंधेरा हो तो उसे रोशनी की अहमियत ज्यादा समझ आती है। शिक्षा के कुछ ऐसे ही चिराग आगरा में भी हैं। इनकी मजबूरियों ने जब पढ़ाई में बाधा डाली तो ज्ञान की जरूरत समझ आई। 
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इसी सोच के साथ बीड़ा उठाया औरों की मजबूरियों में सहारा बनने का और शुरुआत कर दी निशुल्क पाठशाला की। आज यह पाठशाला ऐसे बच्चों में शिक्षा का बीज बो रही है, जो पेट भरने के लिए किताबों से दूर जा रहे थे।  अब इनकी जिंदगी में काम भी है, कलम का ज्ञान भी और इस कलम में स्याही भर रहे हैं चार युवा शिक्षक।

जगदीश पुरा निवासी देवेंद्र सिंह ने एक वर्ष पहले जगदीश पुरा में इस निशुल्क पाठशाला की शुरूआत की है। इसमें वे अपने दोस्त नरेश कुमार (30), धर्मेंद्र (26) और कृष्णा कुमार (22) के साथ किशोरपुरा और जगदीश पुरा की मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाते हैं। देवेंद्र सिंह बताते हैं कि एक साल पहले जब बस्ती के ऐसे बच्चों को देखा जो काम करते हैं। 
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स्कूल नहीं जाते अपना नाम के अक्षर तक नहीं जानते तो उन बच्चों को पढ़ाने और समाज में सम्मान दिलाने की चाहत मन में पाल ली। जब पाठशाला की शुरूआत की थी, तब मात्र दस बच्चे पढ़ने आते थे, लेकिन अब लगभग 150 बच्चे प्रतिदिन आते हैं। 
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ये है पाठशाला का समय

पाठशाला का समय दोपहर तीन से शाम छह बजे का है। नरेश कुमार ने बताया कि वे जूता कारखाना चलाते हैं। इसके साथ ही खुद भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। शाम को तीन घंटे का समय निकालकर बच्चों को पढ़ाने जाते हैं। वहीं, धर्मेंद्र का कहना है कि वह आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इंटर के बाद नहीं पढ़ पाए और आज जूता कारीगर हैं। 

जबकि किसी सरकारी विभाग में काम कर देश की सेवा करना चाहता था। जो हसरत मेरी पूरी न हो सकी वे इन बच्चों की करूंगा। कृष्णा कुमार बताते हैं कि वे अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं। उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। परिवार चलाने के लिए परचून की दुकान चलाते हैं। इससे ही पढ़ाई का खर्च निकालते हैं। जब बच्चों को पढ़ाने आते हैं तो दुकान पर मां को बैठाकर आते हैं। पाठशाला का खर्च चारो अपने जेबखर्च के पैसों से चलाते हैं। 
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अंग्रेजी बोलना सिखाएंगे

पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों को अब वह फर्राटे दार अंग्रेजी सिखाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने बस्ती के ही कुछ अंग्रेजी के जानकार छात्रों से बात की है। जल्द ही यहां इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स शुरू किया जाएगा।
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