विधानसभा चुनाव में अपनी नैया पार लगाने के लिए उम्मीदवार तमाम फंडे अपना रहे हैं। पार्षद बनने के तलबगार नेताओं को सपने दिखाए जा रहे हैं उनकी मुराद पूरी कराने के। उनसे कहा जा रहा है कि इस चुनाव में वह उनका साथ दें। निकाय चुनाव में वह उनका बेड़ा पार लगा देगा। एक -एक वार्ड में कई-कई नेताओं से वायदे किए जा रहे हैं। मौजूदा पार्षदों को भी इसी तरह साथ लिया जा रहा है।
नगर निगम में 90 और छावनी बोर्ड में आठ वार्ड हैं। इनमें चार विधानसभा सीटें आती हैं। उत्तर, दक्षिण, छावनी और एत्मादपुर। अगला चुनाव नगर निकाय का होना है। इसके लिए पार्षद और मेयर के दावेदार अभी से सक्रिय हो गए हैं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो पिछले चुनाव में हार गए थे। इस बार बेड़ा पार कराने के लिए इन्होंने विधानसभा के उम्मीदवारों की शरण ली है। उम्मीदवारों ने भी मौके का फायदा उठाकर इन्हें वार्ड प्रभारी की जिम्मेदारी देना शुरू कर दिया है। इन्हें लग रहा है कि एक पंथ दो काज हो रहे हैं।
एक तो नेताजी पर अहसान हो रहा है, दूसरा अगले चुनाव की तैयारी। विधानसभा के उम्मीदवार ही नहीं, संगठन के नेता भी इनसे फायदा उठा रहे हैं। अब बड़े नेताओं की रैली और रोड शो का रंग जमाने के लिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी इन पर ही डाली जाएगी। ठीक वैसे ही जैसे कुछ दिन पहले तक विधानसभा चुनाव के टिकट दावेदारों को जिम्मा दिया गया था। देहात में नगर पंचायत और नगर पालिका का चेयरमैन और वार्ड का सभासद बनाने के सपने दिखाए जा रहे हैं।
तो तुम मेयर का टिकट पक्का समझो
आगरा। दक्षिण विधानसभा सीट से रालोद के टिकट पर नामांकन करने के बाद मैदान से हट जाने वाले पूर्व मंत्री चौधरी बशीर के बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें बसपा ने मेयर के चुनाव में टिकट देने का आश्वासन दिया है। लेकिन चौधरी बशीर से कई जगह लोग सवाल कर चुके हैं कि उन्हें यह आश्वासन किस नेता ने और किस आधार पर दिया है? क्योंकि अभी तक मेयर का पद आरक्षित है।