World Hepatitis Day 2023: विशेषज्ञों का कहना है कि झोलाछाप की जांच और इलाज से हेपेटाइटिस हो रहा है। हेपेटाइटिस बी और सी गंभीर हैं। हर साल 2.25 फीसदी मरीज मिल रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
झोलाछाप के इलाज और पैथोलॉजी लैब में जांच कराने से लोग अनजाने में हेपेटाइटिस बी और सी के रोगी बन रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) में हर साल 2.25 फीसदी नए मरीज मिल रहे हैं। पूछताछ में इन्होंने झोलाछाप से जांच और इलाज कराने की जानकारी दी।
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एनवीएचसीपी प्रभारी अधिकारी डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि लैब में 26601 मरीजों की जांच हुई, जिसमें 597 मरीजों में हेपेटाइटिस बी और सी मिला। इनमें 377 को हेपेटाइटिस बी और 220 को हेपेटाइटिस सी मिला। पूछताछ में 90 फीसदी मरीजों ने बीमार होने पर बिना मानक वाली लैब में खून की जांच, दलाल से रक्त की व्यवस्था करते हुए झोलाछाप से सर्जरी समेत इलाज कराने की जानकारी दी। इनके यहां उपकरण दूषित होने और बिना मानक वाली ब्लड बैंक से रक्त चढ़ाने से इनको ये बीमारी लगी। 10 फीसदी में बीमारी की वजह असुरक्षित यौन संबंध रहे। बीमारी के लक्षण नजर आने पर इलाज के लिए आए, जिसमें हेपेटाइटिस की जानकारी हुई।
स्वास्थ्य विभाग के अपंजीकृत अस्पताल नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि इसी महीने 12 पैथोलॉजी लैब सील कीं। इनमें डॉक्टर नहीं थे और झोलाछाप ही खून की जांच कर रहे थे। छापे के वक्त इनकी मशीन, सिरिंज समेत अन्य गंदे और दूषित मिले। फतेहाबाद समेत देहात में पांच अस्पताल सील किए, जिसमें सिजेरियन, महिलाओं का रक्त चढ़ाते हुए झोलाछाप मिले। इनके उपकरण संक्रमित होने से हेपेटाइटिस का पूरा खतरा है।
एनवीएचसीपी के नोडल अधिकारी डॉ. सूर्यकमल ने बताया कि हेपेटाइटिस ए और बी दूषित पानी और भोजन करने से होता है। इसके मरीज अधिकांश बरसात में अधिक मिलते हैं। हेपेटाइटिस बी और सी गंभीर हैं। इनका यहां निशुल्क इलाज मिल रहा है। मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद 84 दिन इलाज चलता है। निजी अस्पतालों में 30-35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इलाज से 127 मरीज ठीक हो गए हैं।
- विशेषज्ञ चिकित्सक और सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराएं।
- भारत सरकार और मान्यता प्राप्त ब्लड बैंकों से ही रक्त लें।
- सुरक्षित यौन संबंध बनाएं, दूषित सिरिंज का इस्तेमाल न करें।