यमुना एक्सप्रेसवे पर पिछले 14 वर्षों में 8,812 सड़क हादसे दर्ज हुए हैं, जिनमें सबसे बड़ी वजह चालक को झपकी आना और तेज रफ्तार रही है। हालिया बस हादसे के बाद सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं और विशेषज्ञों ने एक्सप्रेसवे पर सख्त सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा स्थित राया कट पर हुए भीषण बस हादसे में चार लोगों की माैत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर घायल हो गए। यह पहली दुर्घटना नहीं है। इससे पहले भी यमुना एक्सप्रेसवे पर रफ्तार और झपकी लोगों की जान ले चुकी है। हादसों की रोकथाम के लिए कई बार कवायद की जाती रही हैं मगर अंकुश नहीं लग सका। एक्सप्रेसवे अथॉरिटी ने भी खामियों को दूर करने के लिए कदम नहीं उठाए। पिछले 14 साल की बात करें तो 8,812 हादसे हुए। इस हिसाब से हर दिन दो हादसों ने सफर को जानलेवा बना दिया।
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इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर व्यापक सड़क सुरक्षा सुधार लागू करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत प्राप्त सूचना के अनुसार, वर्ष 2012 से 2025 के बीच यमुना एक्सप्रेसवे पर 8,812 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जैन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रदेश में एक समग्र एक्सप्रेसवे सड़क सुरक्षा मिशन प्रारंभ किया जाए।
रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बसों एवं भारी वाहनों की गति सीमा घटाकर 50 किमी प्रति घंटा की जाए। रात्रि 12 बजे से तड़के 4 बजे तक सामान्य परिस्थितियों में बसों एवं भारी मालवाहक वाहनों का संचालन रोका जाए। प्रत्येक 40–50 किलोमीटर पर आधुनिक ड्राइवर विश्राम केंद्र स्थापित किए जाएं। चाय, कॉफी एवं भोजन नो प्रॉफिट–नो लॉस आधार पर उपलब्ध कराया जाए। ताकि चालक विश्राम करने के लिए प्रेरित हों। लंबी दूरी की प्रत्येक बस एवं भारी वाहन में दो चालक अनिवार्य किए जाएं।
यह सुझाव दिए
चालक के अधिकतम कार्य घंटों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए।
पांच मिनट के भीतर एंबुलेंस एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए।
न्यूनतम 10 लाख की विशेष बीमा सहायता सुनिश्चित की जाए।
आईआईटी दिल्ली की सिफारिशों का स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।
प्रत्येक एक्सप्रेसवे का वार्षिक स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई सार्वजनिक पोर्टल पर प्रदर्शित की जाए।
औसत गति प्रणाली पूरे एक्सप्रेसवे पर प्रभावी रूप से लागू की जाए।
यह है स्थिति
- 3,700 दुर्घटनाएं (41.98%) चालक को नींद या झपकी आने से।
- 1,999 दुर्घटनाएं (22.68%) चालक की लापरवाही एवं अन्य मानवीय कारणों से।
- 1,319 दुर्घटनाएं (14.97%) अत्यधिक गति की वजह से।
- 65 प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाएं मानवीय व्यवहार से हुई हैं।
2025 में सबसे अधिक दुर्घटनाएं
वर्ष 2023 - 411
2024 - 528
2025 - 659
पिछले 14 वर्षों में 1,47,01,621 दोपहिया वाहन एवं ट्रैक्टर-ट्रॉलियां यमुना एक्सप्रेसवे से गुज़रीं।
131 करोड़ खर्च, फिर भी बढ़ते हादसे
यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क सुरक्षा सुधारों के लिए लगभग 131 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। आईआईटी दिल्ली की ओर से विस्तृत रोड सेफ्टी ऑडिट किया गया था, जिसके आधार पर रंबल स्ट्रिप्स, अतिरिक्त साइनेज, स्पीड मॉनिटरिंग, बैरियर सुरक्षा, फॉग वार्निंग सिस्टम सहित अनेक इंजीनियरिंग सुधार किए गए।
यह हुई घटना
मंगलवार तड़के लगभग साढ़े तीन बजे तेज रफ्तार वोल्वो बस आगे चल रहे गिट्टी से भरे ट्रेलर में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह ट्रेलर में घुस गया। चार लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उस समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे।