आगरा। जन्म से बीमारी, रक्तस्राव और असहनीय दर्द। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से जूझने पर भी हीमोफीलिया के मरीजों का हौसला कम नहीं हुआ। जज्बा ही तो है जो बीमारी पर भारी पड़ रहा है। शहर में ऐसे 162 मरीज हैं जो सामान्य जीवन जी रहे हैं।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि हीमोफीलिया आनुवंशिक विकार है। ये माता-पिता से बच्चों में जीन म्यूटेशन के चलते होती है। इसमें रक्त का थक्का जमाने वाले प्रोटीन की कमी हो जाती है। इससे चोट लगने पर रक्तस्राव होने लगता है, बंद नहीं होता, कई बार फैक्टर की कमी के कारण आंतरिक रक्तस्राव होने लगता है।
हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी और हीमोफीलिया बी में फैक्टर 9 की कमी हो जाती है। इनकी पूर्ति के लिए अतिरिक्त फैक्टर लगाए जाते हैं। एसएन के बाल रोग विभाग की हीमोफीलिया क्लीनिक में निशुल्क इलाज और फैक्टर की सुविधा है। हीमोफीलिया के प्रभारी डॉ. मधु सिंह ने बताया कि अभी 162 मरीजों का इलाज हो रहा है। इसमें से हीमोफीलिया ए के 121 और हीमोफीलिया बी के 41 मरीज हैं। यहां पूरी तरह इलाज निशुल्क है। निजी में हर महीने 15-20 हजार रुपये का खर्च आता है।
ये बरतें सावधानी
- फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जाती है। इससे ये मरीज सामान्य जीवन जीते हैं।
- फुटबॉल, बॉक्सिंग से बचें। हेलमेट, घुटने और कोहनी के गार्ड का उपयोग करते हुए खेलें।
- दंत रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर मसूड़ों से खून बहने से रोकने को नियमित ब्रश करें।
- जोड़ों को मजबूत करने वाले तैराकी, पैदल चलना, साइकिल चलाने का अभ्यास करें।
- रक्तस्राव होने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाकर उपचार कराएं।
- परिवार में हीमोफीलिया का इतिहास है, तो गर्भावस्था में जेनेटिक काउंसलिंग कराएं।
केस 1: शाहगंज निवासी 28 साल के युवक ने बताया कि उन्हें हीमोफीलिया है। फैक्टर और जज्बे से इस बीमारी का सामना कर रहा हूं। बस सावधानी और चिकित्सकीय परामर्श के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा हूं।
केस 2: दयालबाग निवासी 16 साल के किशोर ने बताया कि हीमोफीलिया में जब आंतरिक रक्तस्राव होता है तो बेहद दर्द होता है। लेकिन फैक्टर और हौसले से बीमारी को हरा रहा हूं।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार