उन्होंने बताया कि इन मरीजों की फिटनेस की बात करें तो इनका पेट निकला हुआ था, कमर पर चर्बी जमी थी। मोटापा, पैरों में सूजन की परेशानी मिली। 5 फीसदी में मधुमेह और उच्च रक्तचाप के भी मरीज रहे। 22 फीसदी में धूम्रपान-एल्कोहल का भी शौक था। इतना होने पर भी इन्होंने हृदय की जांच कराने और फिटनेस सुधारने पर गौर नहीं किया। इनमें से 2 फीसदी मरीजों में हार्टअटैक का भी खतरा था।
बेढ़ई-कचौड़ी और समोसा बढ़ा रहा युवाओं में हृदय रोग
एसएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बसंत गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में महीने में 1800 मरीज आ रहे हैं। इनमें युवाओं की संख्या 35 फीसदी से अधिक है। इनमें कामकाजी युवा अधिक हैं। ये बैठने का कार्य अधिक करते हैं, खानपान में रोजाना फास्ट फूड और शीतल पेय करते हैं। देर रात में सोते हैं। खासतौर से बेढ़ई, कचौड़ी, समोसा समेत अन्य तली सामग्री सप्ताह में 4-5 दिन खाते हैं। इनको कई बार उबल चुके तेल में तला जाता है। इससे खराब कोलेस्ट्राल बढ़ने से हृदय की नस में चर्बी जमा होने लगती है, जिससे रक्त संचार और ऑक्सीजन प्रभावित होती है और हृदयाघात भी पड़ते हैं।
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