10 साल में काट दिया 14 किमी वनक्षेत्र
2011 से 2021 के बीच दस साल में आगरा के वनक्षेत्र में 14 किमी की कमी आई है। वन क्षेत्र वर्ष 2011 में 276 किमी से घटकर अब वर्ष 2021 की रिपोर्ट में 262.62 वर्ग किमी रह गया है। इस अवधि में यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ एक्सप्रेसवे, माल रोड चौड़ीकरण, रेलवे लाइन बिछाने और बिजली परियोजनाओं के साथ आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट आदि में 1.40 लाख पेड़ काट दिए गए जो 100 साल तक पुराने थे।
| साल |
हरित क्षेत्र |
किमी |
| 2011 |
6.84% |
276.00 |
| 2013 |
6.78% |
273.00 |
| 2015 |
6.75% |
273.00 |
| 2017 |
6.73% |
272.00 |
| 2019 |
6.50% |
262.60 |
| 2021 |
6.50% |
262.62 |
10 वर्ष लगते हैं पेड़ बनने में
आगरा में कई विकास कार्यों के लिए पुराने पेड़ काटे गए हैं। उनकी जगह जो पौधे लगे हैं, उन्हें पेड़ बनने में कम से कम 10 वर्ष का समय चाहिए। इसलिए नई रिपोर्ट में न कमी और न बढ़ोतरी दिखाई है। इसमें पुराने आंकड़े शामिल किए गए हैं। - राकेश चंद्रा, वन संरक्षक आगरा मंडल
रिपोर्ट ने विभागों की पोल खोली
फॉरेस्ट सर्वे की रिपोर्ट ने सरकारी विभागों की पोल खोलकर रख दी है। एक इंच भी हरियाली का न बढ़ना बताता है कि मानसून में हर वर्ष लाखों पौधे केवल कागज पर लगाए जा रहे हैं। ये बेहद शर्मनाक हालात है, टीटीजेड चेयरमैन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। - डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद
दावों की ऑडिट कराई जाए
बेहद चिंताजनक रिपोर्ट है। हर साल लाखों पौधे लगाने के जो दावे किए गए हैं, उनकी ऑडिट कराई जाए। इसमें तकनीक का इस्तेमाल हो और जो विभाग दोषी है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। - उमेश शर्मा, सदस्य, टीटीजेड अथॉरिटी