कैंसर जैसी बीमारी भी इनके हौंसले से हार गई। तंबाकू से तौबा की, इलाज लिया और जंग जीत गए। जिले में कैंसर के ऐसे 3250 मरीज हैं, जो पूरी तरह से ठीक होकर सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।
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आगरा कैंसर सोसाइटी के मुताबिक निजी चिकित्सकों के पास साल में करीब कैंसर के 7500 और एसएन मेडिकल कॉलेज में 1200-1500 नए मरीज आते हैं। इनमें फेफडे़, मुख, पित्त की थैली, खाने की नली, स्तन-बच्चेदानी के मुख के कैंसर के मरीज होते हैं। इस साल इनमें से 3250 मरीज इलाज के बाद पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा पहली और दूसरी स्टेज के मरीज हैं। मुख के कैंसर के वही मरीज ठीक हुए, जिन्होंने शुरुआत में ही इलाज शुरू कराया और तंबाकू समेत अन्य नशा पूरी तरह से छोड़ दिया।
पहली और दूसरी स्टेज के मरीज ज्यादा
औसतन साल में विशेषज्ञों के पास कैंसर के नए नौ हजार मरीज आते हैं, इनमें इलाज से करीब 3250 मरीज ठीक हुए हैं। कैंसर की पहली-दूसरी स्टेज वाले 80 फीसदी मरीज पूरी तरह से ठीक हो रहे हैं। - डॉ. संदीप अग्रवाल सचिव आगरा कैंसर सोसाइटी
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डॉ सुरभि गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
ठीक होने का प्रतिशत 30-35 फीसदी
अंतिम स्टेज या फिर मर्ज बिगड़ जाने के बाद आने वाले मरीजाें को बचाना मुश्किल होता है। मुख कैंसर में तंबाकू समेत अन्य नशा छोड़ने और इलाज से कुल मरीजों में से 30-35 फीसदी तक ठीक हो रहे हैं। - डॉ. सुरभि गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक कैंसर रोग विभाग एसएन मेडिकल कॉलेज
राजेश ने छोड़ा गुटखा, ऑपरेशन से हुए ठीक
धनौली निवासी राजेश शर्मा 30 साल से गुटखा खाते थे। मार्च 2014 में जबड़े में कैंसर की पता चला। चिकित्सकों ने तत्काल गुटखा बंद करने को कहा। अमल में लाया और दिसंबर में ऑपरेशन हुआ। तब से तंबाकू और किसी भी तरह के नशे को पूरी तरह से छोड़ दिया। पांच साल तक चिकित्सकीय निगरानी के बाद मर्ज पूरी तरह से ठीक हो गया है।
52 साल के नरेश पाल किरावली के रहने वाले हैं। इनको बीड़ी पीने से गले में कैंसर हो गया। 2014 में डॉक्टरों ने इसकी पुष्टि की। इसके बाद 2010 तक एसएन के कैंसर रोग विभाग में इलाज चला। अब यह पूरी तरह से ठीक हैं। इनका कहना है कि चिकित्सक ने इलाज से पहले ही कहा था कि बीड़ी छोड़ोगे तभी कुछ फायदा होगा।
इन्हें सलाम : शिक्षक दंपति ने 900 लोगों की तंबाकू छुड़वाई
आरबीएस कॉलेज में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू जैन और हिंदुस्तान कॉलेज के शिक्षक डॉ. नवीन गुप्ता तंबाकू के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। डॉ. नवीन गुप्ता बताते हैं कि उनके अभियान से प्रेरित होकर करीब 900 लोग तंबाकू छोड़ चुके हैं। उन्होंने देखा कि अधिकांश ऑटो चालक तंबाकू खाते हैं, इनमें कुछ को कैंसर भी हुआ। इनको प्रेरित किया और वे लोग आज तंबाकू पूरी तरह से छोड़ चुके हैं।
यह लक्षण आएं नजर तो हो जाएं सावधान
- स्तन या शरीर के किसी भाग में गांठ या फिर कठोरपन।
- आवाज बैठना, खांसी खत्म बंद न होना, खराश रहना।
- निगलने में दिक्कत, मूत्र त्याग की आदत में बदलाव।
- एकाएक वजन कम होना, कमजोरी, थकावट रहना।
- शरीर के किसी हिस्से से रक्तस्राव होना