जिले की तीन ग्राम पंचायतों के लिए तीन करोड़ रुपये की परफार्मेंस ग्रांट मिली थी। इस धनराशि का करीब तीन माह तक जिला पंचायतराज अधिकारी के पद पर कार्यरत रहे धनंजय जायसवाल ने ग्राम पंचायत सचिवों के साथ मिलकर बंदरबांट किया। किसी ग्राम पंचायत में विकास कार्य नहीं करवाए। तीन साल से चल रही जांच के दौरान आगरा से धनराशि रिकवरी करके शासन को भेजी जा चुकी है।
जिला पंचायतीराज विभाग में धनंजय जायसवाल पहले फतेहाबाद व शमसाबाद ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के पद पर कार्यरत रहे। वर्ष 2017 में वह करीब तीन माह उन पर जिला पंचायतीराज अधिकारी का प्रभार रहा था। इसी दरम्यान परफार्मेंस ग्रांट की धनराशि जिले में आवंटित की गई थी। इन तीन ग्राम पंचायतों में बिचपुरी व दो अन्य पंचायतें शामिल थीं।
इस धनराशि से गांवों में नाली, खरंजे और अन्य विकास कार्य कराए जाने थे, लेकिन यह कार्य नहीं कराए गए और धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया। इसमें तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिवों की भूमिका भी रही। शासन से जब विजिलेंस जांच शुरू की गई तो तत्कालीन सीडीओ रविंद्र कुमार मांदड़ ने इस धनराशि की रिकवरी भी करवाई थी।