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इंजेक्शन से नशा एड्स को दे रहा न्योता, समलैंगिक संबंध से भी फैल रही बीमारी

Sat, 01 Dec 2018 11:48 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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समलैंगिक संबंध और इंजेक्शन से नशा एड्स को न्योता दे रहा है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी) सेंटर में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 207 ऐसे मरीज सामने आए हैं, जिन्होंने इंजेक्शन से नशा लिया और संक्रमित सुई होने पर बीमारी लग गई। 
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एआरटी सेंटर में 90200 मरीज पंजीकृत हैं, जिसमें से 3998 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें से समलैंगिक और संक्रमित सुई के इस्तेमाल से मरीजों की संख्या ज्यादा बढ़ रही है। 49 समलैंगिक और 207 मरीज संक्रमित सुई के इस्तेमाल से एड्स के मरीज बन गए। इसमें 65 मरीजों ने इंजेक्शन से नशा लेने की बात स्वीकारी। 

एआरटी सेंटर प्रभारी डॉ. जितेंद्र दौनेरिया ने बताया कि लोगों में जागरूकता बढ़ने के कारण यौन संबंधों के चलते एड्स के मरीजों के मुकाबले समलैंगिक और इंजेक्शन से नशा लेने वालों की संख्या ज्यादा बढ़ रही है। कई बार मरीज नशे की बात छुपा भी लेता है। ऐसे में नशे के आदी में इसका खतरा ज्यादा बढ़ गया है। 
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बच्चों को कोख से नहीं मिल रही बीमारी

एड्स रोग से पीड़ित दंपति भी संतान का सुख प्राप्त कर रही है। खास बात इनकी संतान को कोख से विरासत में बीमारी नहीं मिल रही। डॉक्टरों की निगरानी में पीड़ित दंपति का इलाज चलता है और गर्भधारण के बाद विशेष सावधानी बरती जाती है। प्रसव होने के बाद बच्चों की जांच कराई तो उनमें ये बीमारी नहीं मिली। 

एसएन के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह बताती हैं कि गर्भधारण से प्रसव तक मरीज विशेष निगरानी में रहता है। इलाज के चलते अधिकांश मौकों पर बच्चों को बीमारी से बचा लिया जाता हे। एआरटी सेंटर में 44 गर्भवती महिलाओं का इलाज चला और इसमें से 30 बच्चे नेगेटिव आए। 

इनके जज्बे से हारी बीमारी

जज्बा हो तो बीमारी भी रास्ता नहीं रोक पाती। ऐसे तमाम मरीज हैं, जो सामान्य जीवन जी रहे हैं। एलिन ओमांश सोसाइटी के यहां 161 मरीज पंजीकृत हैं, जिनमें से 32 की शादी कराई है। 

इसके सचिव अनिल राठौर और अध्यक्ष बॉबी शर्मा ने बताया कि एड्स पाजीटिव मरीजों में आपस में शादी कराने का पहला प्रयास किया तो कोई भी मरीज तैयार नहीं हुआ। परिजन भी आगे नहीं आए, लेकिन काउंसलिंग और जरूरत को देखकर परिजन मान गए और शादी का सिलसिला शुरू हो गया। 
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केस स्टडी एक: 

सिकंदरा रहने वाले 33 साल के युवक पिछले आठ साल से बीमारी से पीड़ित हैं। बीमारी का पता चलने पर उन्होंने जिंदगी से हार मान ली। फिर एलिन ओमांश सोसाइटी के संपर्क में आए और उम्मीद जगी। इलाज के साथ ही पिछले तीन साल पहले शादी हुई। पत्नी और बेटे को ये बीमारी नहीं है। वह सरकारी नौकरी में हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।
 
केस स्टडी दो: 

न्यू आगरा रहने वाले 28 साल के युवक को एड्स है। मोटर पार्ट्स का व्यवसाय है। जांच में बीमारी की पुष्टि हुई तो जीने की तमन्ना ही छोड़ दी। संस्था ने काउंसलिंग की और उनमें सामान्य जीवन जीने को प्रेरित किया। हाल ही में उनकी शादी हुई है, पत्नी भी पाजीटिव हैं और दोनों ही खुशहाल जीवन जी रहे हैं। 
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