आगरा। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहीं। सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत वे आत्मनिर्भरता की सीढ़ी पर उन्नति के कदम रख रही हैं। वे अब बाहर निकलकर डिजिटल प्लेटफार्म तक पहुंच गई हैं। इससे उनके उत्पाद को एक नई पहचान भी मिल रही है।
शाहगंज स्थित जीआईसी मैदान में पांच दिवसीय मंडलीय सरस मेले का आयोजन किया गया है। शुभारंभ मंगलवार को मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने किया। इस दौरान छावनी विधायक जीएस धर्मेश, सीडीओ प्रतिभा सिंह मौजूद रहीं। मेला 18 अक्तूबर तक चलेगा। इसमें आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी जिले में समूह से जुड़ी हुई महिलाओं के उत्पादों के करीब 12 स्टाल लगाए गए हैं।
दीनदयाल धाम फरह की सुंदर कुमारी के घर में सालों से वंदनवार, पोशाक और खाद्य सामग्री में तेल, बेसन, आटा व मसाले बनाने का काम होता है। समूह से जुड़ने से पहले वे अपने उत्पाद को सिर्फ गांव व आसपास के क्षेत्र में पहुंचा पाती थीं। करीब 5 से 6 महीने पहले वह समूह से जुड़ीं, इसमें करीब 10 महिलाएं हैं। इससे अपने काम को आगे बढ़ाया और अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिलाया। सरस मेले में वह अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचा रही हैं।
डिजीटल से मिली उत्पाद को ख्याति
मथुरा के चौमुंहा की रहने वाली संतोष कुमारी ने बताया कि वह 9 साल से पोशाक और पगड़ी बनाने का काम कर रही हैं। उनका उत्पाद मथुरा व उसके आसपास के क्षेत्र में ही जाता था। समूह से जुड़ने के बाद से उनका उत्पाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों के साथ महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली तक निर्यात होता है। उनकी स्टॉल पर 10 से लेकर 300 रुपये तक की पोशाक उपलब्ध हैं। वह अपने उत्पाद को डिजिटल माध्यम से और लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।
चार गुनी हुई आमदनी
फतेहाबाद की ललिता ने बताया कि वह अपने गांव में परचून की दुकान चलाती थीं। दुकान से महीने में चार से 5000 हजार तक की आमदनी होती थी, इससे परिवार चलाना मुश्किल था। उसके बाद समूह की महिलाओं के साथ काम कर वंदनवार उत्पाद को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा रही हैं। इससे वह आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके साथ ही उनकी आमदनी भी चार गुनी हो गई है।