माह-ए-रमजान में यूं तो छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक रोजे रखकर इबादत कर रहे हैं, लेकिन कामकाजी महिलाओं का जोश भी कम नहीं है।
भीषण गर्मी में 15 घंटे का रोजा रखने के बाद भी वह घर के साथ ही आफिस की जिम्मेदारियों को बखूबी संभाल रही हैं। उनका कहना है कि रोजा रखने से थकान नहीं होती बल्कि दिनभर तरोताजा महसूस करती हैं।
बैकुंठी देवी गर्ल्स कॉलेज में उर्दू की विभागध्यक्ष डॉ. नसरीन बेगम का कहना है कि रमजान का महीना हमें बहुत सारी जिम्मेदारियों का अहसास कराता है। अमन व सलामती, मोहब्बत, भाईचारे और दुखी इंसानियत की जरूरत पूरी करने का मौका देता है।