फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सत्संग में मुक्ति के लिए महिला ने उठाया ऐसा कदम, लोग करने लगे बुराड़ी कांड से तुलना

Sun, 08 Jul 2018 08:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन
आगरा के मलपुरा क्षेत्र के एक गांव में शुक्रवार को चल रहे सत्संग में एक महिला ने खुदकुशी का प्रयास किया। उसने साड़ी से फंदा बनाया, पंडाल की बल्ली से इसे बांधा और लटक गई। 
विज्ञापन


गनीमत रही कि पास बैठे लोगों की नजर उस पर पड़ गई। उन्होंने उसे बचा लिया। फंदे से उतारे जाते ही महिला बोली, मुझे रोको नहीं, मैं मुक्ति चाहती हूं। इसकी सूचना पर ककुआ चौकी पुलिस पहुंच गई।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाया कि यह सही नहीं है, इस पर वो शांत हो गई। थोड़ी देर बाद उसे घर भेज दिया गया। महिला आगरा के यमुना ब्रिज की रहने वाली है। 55 साल उम्र है।
विज्ञापन

बुराड़ी कांड से तुलना

महिला ने जैसे ही कहा कि उसे मुक्ति चाहिए, वैसे ही लोगों के जहन में दिल्ली के बुराडी़ की घटना आई गई। अब यह हवा चल पड़ी है, कुछ और लोग ऐसा पागलपन कर सकते हैं। 

महिला सत्संग सुनने के लिए गई थी। काफी भीड़ आई हुई थी। सभी लोग जय भोले बाबा की बोल रहे थे। तभी महिला खड़ी हुई। उसकी हरकतों से आसपास के लोग चौंक गए थे। महिला ने अपनी साड़ी उतार दी।
 
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि वे समझ रहे थे कि गर्मी और उमस के कारण उसने साड़ी उतारी है, लेकिन वो कुर्सी पर चढ़ गई। साड़ी का एक सिरा ऊपर बल्ली से बांध दिया। इसके बाद फंदा बनाया और कुर्सी को लात मारकर लटक गई।
विज्ञापन

'मुक्ति पाने' के लिए उठाया ये कदम

तुरंत ही लोगों ने उसे पकड़ लिया। फंदा ठीक से कस पाता, इससे पहले ही उसे नीचे उतार लिया। लोगों ने उससे पूछा कि वो ऐसा क्यों कर रही है, उसका कहना था कि वो मुक्ति चाहती है, जीवन से जी भर गया है, उसे प्रभु की शरण में जाना है। 

इस पर लोगों ने पुलिस बुला ली। पुलिस ने समझाया कि ऐसा नहीं करते, यह अपराध है, खुदकुशी कायर लोग करते हैं। मुक्ति चाहिए तो भक्ति करो, इस पर महिला शांत हो गई। उसे घर भेज दिया गया।

उक्त महिला काफी समय से बीमार चल रही है। वहीं इस संबंध में मानसिक चिकित्सा केंद्र एवं स्वास्थ्य संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर दिनेश राठौर ने बताया कि यह मनोरोग की एक अवस्था है। 

इसमें इंसान को कुछ अजीब महसूस होता है, वो उसे ही सच समझता है। सच की दुनिया से वो खुद को जुदा कर बैठता है और इस तरह की हरकत कर बैठता है। इस रोग का उपचार संभव है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें