फिर एक दिन 2021 में किन्नर दोबारा आई। बेटी को देख उसकी नीयत खराब हो गई। बेटी को चुरा ले गई। पुलिस में शिकायत की, तो फर्रुखाबाद में किन्नर के घर में अक्तूबर 2021 को बेटी पाई गई। बाल कल्याण समिति ने 22 दिसंबर 2021 को मुझे बेटी सौंप दी। मैं हर 15-15 दिन बाद उसे लेकर समिति को दिखाने जाती थी। किन्नर को यह रास न आया।
उसकी शिकायत पर बाल समिति ने 17 अगस्त 2022 को मेरी बेटी मुझसे यह कहते हुए छीन ली कि तुम उसकी अच्छी शिक्षा व पालन-पोषण नहीं कर सकती। 11 महीने से मेरी बेटी बालगृह में है। वहां वह रो-रोकर परेशान है। इसे मैंने आठ साल पाला, क्या उसे अब मैं नहीं पाल सकती। जिसे मैंने बड़े स्कूल में पढ़ाया, क्या उसे बाल समिति वहां पढ़ा सकती है।
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बच्ची के हित में लेंगे निर्णय
मनोदशा पर पड़ेगा असर
जेजे एक्ट में पांच साल तक किसी बच्चे को अगर कोई पालता है तो वह उसके पालन का अधिकारी होता है। बालगृह में बच्ची की मनोदशा पर खराब असर पड़ेगा। बच्ची के हित में उसे जिन्होंने पाला है, उन्हें सौंप देना चाहिए। -नरेश पारस, बाल अधिकार कार्यकर्ता