चिकित्सक ने यह कहा
आरोपी चिकित्सक का कहना है कि ये पेशाब नहीं रोक पा रही थी और गर्भस्थ शिशु कम दिनों का है। पेशाब की थैली पूरी भरने पर ही बच्चेदानी स्पष्ट दिखाई देती है। कम दिनों की गर्भवती थी। इस कारण पेट से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा था, ऐसी स्थिति में दूसरे तरीके से योनि मार्ग से अल्ट्रासाउंड करते हैं। पेशाब लीक नहीं हो, इसके लिए मरीज को पेशाब करके आने को कहा। अल्ट्रासाउंड स्कैनर पर कंडोम लगाया जाता है। इससे मरीज को गलतफहमी हो गई।
तीन चिकित्सकों को जांच सौंपी
प्रमुख अधीक्षक डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि अल्ट्रासाउंड की ये प्रक्रिया है। महिला गलतफहमी की शिकार हो गई। फिर भी मरीज की शिकायत पर आंतरिक जांच भी कराई जा रही है। इसके लिए वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. ज्योत्सना भाटिया, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके मिश्रा और एनेस्थीशियन डॉ. बीपी सिंह को जांच सौंपी है। इनसे 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट को प्रशासन और शासन को भेजा जाएगा।
रोजाना 50 से 60 अल्ट्रासाउंड, एक ही चिकित्सक
लेडी लॉयल में रोजाना 50 से 60 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड होते हैं। अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट है, जो गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करते हैं। अल्ट्रासाउंड करते वक्त कक्ष में महिला स्टाफ की नियुक्ति होती है, लेकिन वह भी मौके पर नहीं थी। प्रमुख अधीक्षक का कहना है कि महिला स्टाफ की ड्यूटी रहती है, कैसे उपस्थित नहीं रहीं, इसकी भी पता करता हूं।