इससे पहले राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन जिला जज विवेक संगल ने किया। जिला जज ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत सस्ते और सुलभ न्याय का मार्ग है। उन्होंने लोक अदालत के लाभ के बारे में बताया। इस मौके पर स्पेशल जज नीरज गौतम, नोडल अधिकारी मोहम्मद राशिद, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नवीन कुमार के अलावा स्पेशल सीजेएम मुक्ता त्यागी, कोर्ट मैनेजर नवनीत कुमार शर्मा सहित अन्य न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
60 हजार का लोन लिया, बैंक ने भेजा 1.50 लाख का नोटिस
इरादतनगर के भज्जीपुरा निवासी हरी सिंह ने बताया कि सात साल पहले बैंक से पिता डालचंद ने 60 हजार रुपये का कृषि लोन लिया था। सात महीने पहले पिता की मृत्यु हो गई। बैंक से नोटिस मिला। इसमें 1.50 लाख रुपये बकाया राशि जमा करने के लिए लिखा है। वह 60 हजार रुपये लेकर आए थे। बैंक कर्मियों ने पूरी रकम जमा करने के लिए बोला। इस पर लौटकर जाना पड़ रहा है।
कोरोना से बेटे की मृत्यु हो गई, अब कैसे चुकाए बिजली बिल
नगला छउआ निवासी 77 वर्षीय तारा देवी मोहल्ले की महिलाओं के साथ आई थीं। वह टोरेंट के शिविर के पास बैठी हुई थीं। बोलीं कि वह लगातार बिजली बिल भर रही हैं। टोरंट कर्मियों ने एक दिन चेकिंग की। घर में बिजली चोरी का आरोप लगाया। इसके बाद बिल भेज दिया। बेटे हेमेंद्र की कोरोना से मौत हो चुकी है। अब कोई सहारा नहीं है। किसी तरह गुजर बसर कर रही है। ऐसे में बिल कैसे चुकाएंगी। शिविर से राहत नहीं मिल सकी है।
पांच साल पहले बिजली कट गई, फिर भी आ रहा बिल
ताजगंज स्थित गोबर चौकी निवासी 57 वर्षीय पूरन देवी ने बताया कि पांच साल पहले बिजली कनेक्शन कट गया था। वह बिजली का उपभोग नहीं करती हैं। इसके बावजूद उनके पास बिल आ रहे हैं। शिविर में कर्मचारियों से समस्या के समाधान के लिए कहा था। लेकिन यहां कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। कर्मचारियों ने कार्यालय पर आने के लिए बोल दिया है।
लोगों को दी कानूनी जानकारी
राष्ट्रीय लोक अदालत में वादकारियों और उपभोक्ताओं की कानूनी सहायता के लिए अधिवक्ता सहयोग समिति ने निशुल्क कानूनी शिविर लगाया। अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार पप्पू, प्रवीन कुमार पाराशर, कृपाल सिंह वर्मा, रामनाथ यादव, उमेश कुमार वर्मा, राजकुमार पिप्पल, वीरेंद्र सिंह, अधर शर्मा, सुरेंद्र सिंह सिकरवार आदि मौजूद रहे।
16 दंपती ने फिर से थामा एक-दूसरे का हाथ
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालय में 68 मामले निपटाए गए। इनमें 16 दंपती ने फिर से एक-दूजे का हाथ थाम लिया। यह ऐसे दंपती थे, जो तलाक लेना चाहते थे या फिर पत्नी अलग रहकर भरणपोषण की मांग कर रही थीं। सालों से अलग रह रहे थे। लोक अदालत में पति-पत्नी ने गिले-शिकवे दूर किए और हंसी-खुशी साथ चले गए।
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