एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में जांच कराने के लिए लगी भीड़।
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मौसम में बढ़ती ठंडक के साथ शहर में वायरल खांसी, शरीर दर्द और बलगम वाली खांसी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। यह खांसी सामान्य दवाइयों से जल्दी ठीक नहीं हो रही और कई मरीजों को लगभग एक महीना तक परेशानी झेलनी पड़ रही है। खांसते समय फेफड़ों पर और दबाव पड़ता है, जिससे असहजता अधिक हो जाती है। सबसे ज़्यादा दिक्कत बुजुर्गों और कम इम्युनिटी वाले लोगों को हो रही है। कुछ ही दूरी चलने पर सांस फूलने, सीने में भारीपन और लगातार खांसी के मामले बढ़ रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि इस समय चल रहे वायरल संक्रमण में बलगम वाली खांसी ज्यादा परेशान कर रही है और सामान्य दवा तुरंत असर नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि यदि मरीज डायबिटिक नहीं है, तो गुड़ और तिल उसके लिए काफी लाभदायक हो सकते हैं। इन दोनों में प्राकृतिक एंटी फाइब्रेटिक एजेंट पाए जाते हैं, जो वायरस से लड़ने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि गुड़-तिल के लड्डू, चिक्की और तिल को भूनकर गुड़ के साथ सेवन जैसी चीजें शरीर को गर्माहट देने के साथ खांसी को कम करती हैं और बलगम को ढीला करने में मदद करती हैं।
सलाह दी कि लोग इन्फ्लुएंजा और न्यूमोकोकल वैक्सीन डॉक्टर से परामर्श के बाद लगवाएं। जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वायरल संक्रमण का खतरा कम होता है। उन्होंने कहा कि बाहर निकलते समय मास्क पहनें, बार-बार ठंडा-गर्म न करें, गर्म पानी का सेवन बढ़ाएं और धूल से बचें। अधिक समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।