आगरा छावनी क्षेत्र में मार्च 2015 से चुनावी प्रक्रिया नहीं हुई है। योगेश कुमार की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए चुनाव नहीं होने पर नाराजगी जताई है। केंद्र सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता सत्य रंजन स्वैन ने कहा कि छावनी परिषद को नगर निगम में विलय करने की प्रक्रिया चल रही है।
इसकी वजह से चुनावों में देरी हुई है। आगरा कंटोनमेंट बोर्ड के अध्यक्ष राजेश गोयल ने बताया कि चुनाव नहीं होने से लगातार छावनी क्षेत्रों में विकास कार्याें की गति भी धीमी हो गई है। उन्हाेंने बताया कि वर्ष 2020 में चुनाव होने थे, लेकिन कोविड की वजह से नहीं हो सके। उसके बाद से लगातार छावनी क्षेत्र को नगर निगम में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी इस मामले को लेकर मुलाकात हुई है। राज्य और केंद्र दोनों सरकारों ने प्रस्ताव मांगा है।
जल्द बोर्ड की तरफ से प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। सरकार की तरफ से आदेश आने के बाद प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विजय कनौजिया, किशन चौधरी, नीतू सिंह, विनोद कुमार, सुमित सक्सेना, राजेंद्र भारती आदि ने चुनाव कराने की मांग की है। लोगों को कहना है जैसे भी हो चुनाव होने चाहिए। युवाओं को भी मौका मिले और क्षेत्र का विकास हो।