झारखंड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन ने बीमार हथिनी को तत्काल परिवहन के लिए लिखित अनुमति जारी की। इसके बाद नए साल की पूर्व संध्या पर हाथी एंबुलेंस में पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और हाथियों की देखभाल करने वाली एक टीम को मथुरा से धनबाद, झारखंड के लिए रवाना किया गया।
वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों को प्रारंभिक जांच में पता चला कि हथिनी को पैरों में गंभीर दर्द है, जिसके कारण वह अपने आगे के दोनों पैरों पर स्वयं का ही भार उठाने में असमर्थ है। विशेष एंबुलेंस में हथिनी ‘एम्मा’ को फरह स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में लाया गया।
वाइल्डलाइफ एसओएस की पशुचिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ. इलियाराजा ने कहा कि वर्षों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार ने उसके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है। उसके पैरों में लगे कांच, कीलें और पत्थर के टुकड़े निकाल दिए हैं।
वाइल्ड लाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि हमें राहत मिली है कि हथिनी ‘एम्मा’ अस्पताल में सुरक्षित पहुंच गई है। मथुरा के डीएफओ रघुनाथ मिश्रा ने कहा कि वाइल्डलाइफ एसओएस टीम की देखरेख में हथिनी का उपचार चल रहा है।