करवन नदी में अब पानी नहीं, बल्कि ‘जहर’ बह रहा है। हाथरस और अलीगढ़ की फैक्ट्रियों से निकला के मिकल करवन नदी को जहरीला कर चुका है। गुलाबी रंग के झाग में पानी नजर ही नहीं आ रहा। करवन नदी की यह हालत क्षेत्रीय विधायक डा. धर्मपाल सिंह और आगरा के कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने खुद देखी। कमिश्नर ने अधिकारियों से नदी में प्रदूषण रोकने के लिए कहा है।
करवन नदी के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण कमेटी की 28 जनवरी को हुई बैठक में चर्चा की गई थी, लेकिन इस प्रदूषण को देखने के लिए कमिश्नर प्रदीप भटनागर को 35 दिन लग गए। क्षेत्रीय विधायक डा. धर्मपाल सिंह के साथ उन्होंने नदी का दौरा किया। नदी में गुलाबी रंग के झाग देखने के बाद कमिश्नर ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी निरंजन सिंह और बीके सिंह से इसकी वजह पूछी। अधिकारियों ने बताया कि हाथरस और अलीगढ़ के कारखानों से के मिकल आ रहा है, जिस वजह से हमेशा ही करवन में ऐसे गुलाबी झाग रहते हैं। कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने दोनों जिलों के अधिकारियों से संपर्क कर केमिकल का डिस्चार्ज रुकवाने को कहा। इस दौरान डा. राम निवास मुदगल, धर्मवीर पहलवान, रिंकू चौहान, जितेंद्र चौहान, बंटी चौहान, पवन आदि मौजूद रहे।
2013 में मरी थीं नील गाय
साल 2013 में करवन नदी का पानी पीने से कई दर्जन नील गायों की मौत हो गई थी। इस बार भी हालात ऐसे ही हैं। तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ प्रशासन ने हाथरस में कार्रवाई की थी।