इस बार भी आंधी-बरसात ने गेहूं को काफी नुकसान पहुंचाया है। अंधड़ से खेतों में खड़ा गेहूं गिर गया था, जबकि कटा गेहूं भीग गया। इससे कई जगह गेहूं के दाने का रंग बदल गया है तो कहीं दाना टूटा और सिकुड़ा है। प्रदेश में 20 जिलों का गेहूं खरीद के मानकों पर फेल हो रहा है।
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एफसीआई वाले गेहूं को लेने में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसे में खरीद एजेंसियों ने भी हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि जब गेहूं का केंद्रों से उठान ही नहीं होगा तो वह खरीदकर कहां ले जाएंगे। खरीद ठप होने से किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। कुदरत के इसी कहर का खामियाजा किसान भुगत रहा है।
प्रदेश में एक अप्रैल से गेहूं खरीद सत्र शुरू हो गया है। प्रदेश में 6000 सेंटर खोले गए हैं। मथुरा जिले में 85 केंद्र हैं। इस बार गेहूं की पैदावार तो अच्छी रही लेकिन कई जिलों में आंधी-तूफान के कारण गेहूं का दाना बिगड़ गया है। खेतों में पड़े कटे गेहूं पर पानी गिर जाने से दाना काला भी पड़ा है।
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तना ही नहीं जब गेहूं की निकासी हुई तो गेहूं का दाना टूट भी गया है। कुदरत के इसी कहर का खामियाजा किसान भुगत रहा है। इस गेहूं को एफसीआई ने खरीद के मानकों पर फेल करना साबित कर दिया है।
खरीद केंद्रों से जो गेहूं एफसीआई के गोदामों पर भेजा जा रहा है वहां उसे रिजेक्ट करके वापस कर दिया जा रहा है। इससे गेहूं खरीद करने वाली एजेंसियां भी परेशान हो गईं हैं। इन एजेंसियों ने किसानों का गेहूं खरीदना बंद कर दिया है। जो पुराना गेहूं पड़ा है उसका भी उठान नहीं हो पा रहा है।
गेहूं खरीद के मानक
- गेहूं में 12 फीसदी तक ही नमी होनी चाहिए। इससे ज्यादा पर गेहूं रिजेक्ट
- गेहूं में जेई, जौं, सरसों अगर 2 फीसदी तक है तो ले लेंगे वरना गेहूं रिजेक्ट
- अगर गेहूं में डैमेज का प्रतिशत 2 फीसदी है तो ले लेंगे वरना गेहूं रिजेक्ट
- गेहूं में हल्का डैमेज 4 फीसदी तक ही लिया जाएगा
- गेहूं का टूटा दाना, सिकुड़ा दाना 6 फीसदी तक लेंगे इससे ज्यादा पर रिजेक्ट
पिछले दिनों पड़ी बरसात और आंधी के बाद पैदा हुई स्थिति
- गेहूं में नमी की स्थिति भी मानक के हिसाब से नहीं है
- गेहूं में टूटा दाना, सिकुड़ा दाना भी 8 फीसदी तक आ रहा है
- गेहूं में डैमेज का प्रतिशत भी बढ़कर 4 तक पहुंच गया है
- खेतों में गेहूं गिर जाने से दाने का रंग भी काला पड़ गया
खरीद के मानकों में शिथिलता की मांग हो रही
बरसात के बाद गेहूं की चमक कम हो गई है। जिसे एफसीआई वाले कमजोर क्वालिटी बताकर लेने से आनाकानी कर रहे हैं। मथुरा के जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजेश्वर सिंह ने बताया कि खरीद के मानकों में अगर