देर तक कंप्यूटर पर चैटिंग, मोबाइल पर लंबी बातें। समय बचा तो टीवी पर पसंदीदा प्रोग्राम। अधिकांश की यही दिनचर्या। समय की जरूरत पर हाईटेक तो बने लेकिन अनजाने में शरीर को बीमारियों का घर बना लिया। रही सही कसर चिकनाईयुक्त-फास्ट फूड के चलन ने पूरी कर दी।
एसएन मेडिकल कालेज की स्टडी बताती है कि इन्हीं आदतों के चलते शहर की 37.20 फीसदी आबादी बीमार है। ये मेटाबॉलिक सिंड्रोम के शिकार हैं। महिलाओं की हालत चिंतनीय मिली, जिनका औसत 74.40 फीसदी रहा। 62.20 प्रतिशत पुरुष भी चपेट में हैं।
सोशल एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन विभाग ने 18 साल से अधिक आयु के 45 पुरुष, 82 महिलाआें पर स्टडी की है। रिसर्च करने वाली डा. विनीता गुप्ता बताती हैं कि साल भर तक इनकी दिनचर्या का आकलन और रक्त की जांच के बाद मेटाबॉलिक सिंड्रोम की शिकार मिले। अधिकांश अपनी बीमारियों से अनभिज्ञ थे। इनमें स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है।
क्या है मेटाबॉलिक सिंड्रोम
मेटाबॉलिक सिंड्रोम अपने आप में कोई बीमारी नहीं। ये शरीर में पाए जाने वाले जोखिम कारकों का एक समूह बोला जाता है। अगर शरीर में उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, बेड कोलेस्टरॉल, मोटापा है। इनमें से तीन परेशानियां आपके शरीर में हैं तो मेटाबॉलिक सिंड्रोम के शिकार हैं।
सास-बहू सीरियल भी बना कारण
स्टडी में पाया कि घरेलू महिलाएं कंप्यूटर-फोन का इस्तेमाल कम करती हैं, लेकिन टीवी देखने में उनका 6-10 घंटे व्यतीत होते हैं। पूछताछ में पता चला कि अधिकांश महिलाएं किसी भी हाल में अपने पसंदीदा सास-बहू के सीरियल नहीं छोड़ती।
टहलना, व्यायाम न के बराबर
सुबह टहलना, व्यायाम न के बराबर मिला। कुछ पुरुष मिले लेकिन नियमित नहीं। महिलाओं का भी यही हाल। पार्क में घूमने जाने वाली महिलाएं, वहां भी झुंड में बैठकर बातों पर ही जोर देती।
- 70 फीसदी महिला-पुरुषों में मोटापा (पेट-कमर पर अत्यधिक चर्बी)
- 58.50 प्रतिशत में हाई ब्लडप्रेशर
- 55.90 में ग्लूकोज बढ़ा हुआ मिला
- 15.20 में हृदय संबंधी परेशानियां
रखें ख्याल
- सुबह टहलें, साइकिल चलाएं
- चिकनाई युक्त भोजन से बचें
- हरी सब्जी, फल, सलाद खाएं
- ई-उपकरण के आदी न बनें
- सोने-जागने का शेड्यूल सुधारें
- जंक-फास्ट फूड से खाने से बचें