बारिश के दौरान ताजमहल में छाता लगाकर घूमते पर्यटक
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मानसून के बादल इस बार आगरा, मथुरा और मैनपुरी से रूठे हुए हैं। सावन के महीने में बारिश का इंतजार रहा तो भादों में भी बादलों की लुकाछिपी जारी है। बादलों के रूठ जाने का असर है कि ताजनगरी में सामान्य से 38 फीसदी बारिश कम हुई है। यानी एक तिहाई बारिश आगरा में कम है। यही हाल पड़ोसी जिलों मैनपुरी, फिरोजाबाद और मथुरा का है। एटा में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है, जबकि कासगंज में भी बारिश ठीक हुई है।
सूबे में 48 जिलों में इस बार सावन और भादों के महीने में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। नोएडा, हापुड़, ज्योतिबा फुले नगर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, चंदौली, फर्रूखाबाद, कानपुर देहात, उन्नाव में बारिश सामान्य से आधी यानी 50 फीसदी ही हो पाई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहरों से मानसून के बादल रूठे हुए रहे हैं। भादों के महीने में भी बादल बरस नहीं रहे हैं।
सिर्फ एटा में ज्यादा बारिश हुई
आगरा के पड़ोसी जिलों में केवल एटा ऐसा शहर रहा, जहां सामान्य से 31 फीसदी बारिश ज्यादा हुई। फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, कासगंज, अलीगढ़ समेत सभी शहरों में बारिश सामान्य से कम रिकार्ड की गई। सावन और भादों के महीनों में कम बारिश का असर भूगर्भ जलस्तर पर पड़ने से किसानों और सबमर्सिबल पंप पर पानी की आपूर्ति के लिए निर्भर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।