केवल बस्तियों के लिए ही यह पानी उपलब्ध होगा। इसकी अन्य जगह बिक्री नहीं की जा सकेगी। तीन साल बाद यह प्लांट नगर निगम को हैंडओवर कर दिया जाएगा। गंगाजल की लाइनें इन जगहों पर बिछाई जा रही हैं, पर उसमें समय लगेगा। इसलिए अस्थायी तौर पर यह व्यवस्था अपनाई जा रही है।
यमुनापार के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं
पार्षदों ने यमुनापार क्षेत्र में पानी देने का सुझाव दिया, जिस पर नगर आयुक्त ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ये तीन बस्तियां चुनी गई हैं। पीरामल सर्वजल से वार्ता करके यमुनापार भी पानी देने का प्रयास होगा। इसके बाद सदन ने प्रस्ताव पास कर दिया।
कैलाश समेत तीन गांव हुए निगम सीमा में शामिल
नगर निगम सीमा में कैलाश महादेव मंदिर समेत तीन गांवों को शामिल कर लिया गया। पार्षद राजेश प्रजापति के प्रस्ताव पर सदन में चर्चा हुई, जिसमें पार्षद फौरन सिंह ने सिकंदरपुर, मनोहरपुर गांव को भी निगम में शामिल करने की मांग की, लेकिन सदन ने बांईपुर मुस्तकिल, स्वामी मुस्तकिल और फतेहाबाद रोड पर मायापुर गांव को शामिल करने का प्रस्ताव पास कर दिया।
इससे शहरी सीमा में इन तीनों गांवों की 19 हजार की आबादी आ जाएगी और करीब 1110 हेक्टेयर क्षेत्रफल और जुड़ जाएगा। कैलाश महादेव मंदिर और होटल रमाडा एवं कलाल खेरिया गांव के बीच के मायापुर गांव के जुड़ जोन से निगम की सीमा इनर निंग रोड तक पहुंच जाएगी।