सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही आगरा से कूड़े की समस्या दूर हो जाएगी। शहर से निकलने वाले कूड़े से बिजली बनेगी। कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित की गई विशेषज्ञों की दो सदस्यीय कमेटी ने हरी झंडी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के दिल्ली जोनल सेंटर वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अतिरिक्त निदेशक एवं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट डिवीजन के हेड डॉ. एसके निगम ने कुबेरपुर में पुराने छह लाख टन कूड़े का निस्तारण भी करने की सिफारिश की है।
पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योगों के विस्तार और नई इकाइयों के लगाने पर रोक के बाद पहली बार किसी रिपोर्ट में माना है कि इस प्लांट से प्रदूषण स्तर कम रहेगा। इससे टीटीजेड के उद्योगों पर तदर्थ रोक हटाने के लिए प्रदेश सरकार की मांग को मजबूती मिलेगी, वहीं रोक हटने से 9500 से ज्यादा इकाइयों के विस्तार और नई औद्योगिक इकाइयों के खुलने का रास्ता तैयार हो सकता है।
प्रदूषण के भारत स्टेज, यूरो मानक करेंगे पूरे
नीरी एवं विशेषज्ञों ने कहा कि चिमनी से निकलने वाली गैस प्रमुखत: जलवाष्प और कार्बन डाइक्साइड गैस होगी। इस प्लांट के प्रदूषण नियंत्रण मानक भारत स्टेज और यूरो मानकों के मुताबिक होंगे। पहले से जमा 6 लाख टन कूड़े के कारण मीथेन गैस बन रही है जो इस प्लांट के काम करने से नहीं बनेगी। तकनीक, ड्राइंग और कार्बन उत्सर्जन का पूरा ब्योरा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है।
एएसआई से चिमनी की ऊंचाई की लेनी होगी अनुमति
ताजमहल के उत्तर पूर्व में मौजूद कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर प्रस्तावित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की चिमनी की ऊंचाई के लिए दो सदस्यीय कमेटी ने सिफारिश की है कि इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से अनुमति ली जाए ताकि ताजमहल की दृश्यता बाधित न हो।
मिट्टी, हवा, भूगर्भ जल पर असर का अध्ययन हो
नीरी और सीपीसीबी की संयुक्त टीम ने सिफारिश की है कि आगरा में तीन वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के कारण विशेषज्ञ एजेंसियों से मिट्टी, हवा और भूगर्भ जल पर प्लांट और पुराने कूड़े के असर का पर्यावरणीय अध्ययन कराया जाए, जिसमें वर्तमान और भविष्य को ध्यान में रखा जाए। पुराने कचरे के निस्तारण के लिए आगरा नगर निगम स्पाक ब्रेसन कंपनी से बैंक गारंटी जमा कराएं।