उत्तर प्रदेश के आगरा में वक्फ संपत्ति के बिल की चर्चाओं के बीच विभागीय कवायद शुरू हो गई है। जिले की सभी वक्फ संपत्तियों का सर्वे कराया जा रहा है। राजस्व विभाग की टीम करीब एक माह बाद सर्वे को पूरा कर रिपोर्ट अल्पसंख्यक विभाग को देगी। इसके अलावा तहसीलों के राजस्व अभिलेखों में भी इस प्रकार की संपत्ति का सही ब्योरा दर्ज किया जाएगा। इस सर्वे का मूल उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की सही स्थिति का पता करना और कब्जे संबंधी विवादों के निस्तारण का है।
जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नीलिमा सिंह ने बताया कि आगरा में 33 साल बाद वक्फ संपत्तियों का सर्वे हो रहा है। इससे पूर्व 1989 में गजट प्रकाशन से पूर्व सर्वे हुआ था। प्रकाशित गजट के अनुसार 1751 संपत्तियां सुन्नी और 52 शिया बोर्ड के नाम पर दर्ज हैं। राजस्व विभाग सर्वे को पूरा करने में लगा है।
पिछले दिनों शासन ने इस संबंध में पत्राचार करते हुए वर्तमान संपत्तियों की निर्धारित प्रारूप में सूचना मांगी थी। सर्वे पूरा होने के बाद जो संपत्ति वक्फ की पाई जाएगी उसे अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा वक्फ संपत्तियों की जो भी जमीन हड़पी गई या किसी को बेचा गया है, उसे भी चिन्हित किया जाएगा।
बोर्ड की जो बंजर, ऊसर सहित अन्य भूमि थी, जिनका रिकॉर्ड नहीं दर्ज किया गया, अब उनका भी ब्योरा जुटाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश वक्फ अधिनियम 1960 को लागू करते हुए वक्फ बोर्ड की सभी संपत्तियों का रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाएगा।
ऐसी संपत्तियों के रिकॉर्ड में कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह जैसी संपत्तियां सही स्थिति में दर्ज हैं या नहीं, इसका पता लगाया जाएगा। ताकि भविष्य में इन संपत्तियों को लेकर किसी भी प्रकार की विवाद की स्थिति पैदा न हो सके।