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कौमी एकता का पैगाम देती है सुहाग नगरी की चूड़ियों की खनक, चंद शरारती तत्वों ने बिगाड़ा माहौल

Sun, 22 Dec 2019 01:27 PM IST
Abhishek Saxena दीपक जैन, अमर उजाला, फिरोजाबाद
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चूड़ियां - फोटो : अमर उजाला
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चंद शरारती तत्वों के सिवाए कोई नहीं चाहता कि कांच की इस नगरी का शांत माहौल खराब हो। सुहाग की प्रतीक चूड़ियां बनाने वाले इस शहर का उद्योग कौमी एकता की मिसाल है। मुस्लिम कारीगरों की बनाई चूड़ियां महिलाओं की कलाई की शोभा बनती हैं।
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चूड़ी और कांच उद्योग का पूरा ढांचा हिंदू-मुस्लिमों के सामंजस्य से बंधा है। यही कारण है कि जब-जब शरारती तत्वों ने माहौल खराब करने की कोशिश की है तब-तब अमन पसंद लोगों ने इस कृत्य की सामूहिक रूप से निंदा की है।

शुक्रवार को सुहागनगरी में हुए उपद्रव के कारण चूड़ियों की खनक खामोश रही। शहर के प्रमुख चूड़ी बाजार गली बौहरान में दिन भर खननके वाली चूड़ियां खनक नहीं रही थी। इमामाबाडा से लेकर शीशग्रान का चूड़ी बाजार बंद था।
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बंद पड़ा फिरोजाबाद का बाजार - फोटो : अमर उजाला
मोहल्ला शेखलतीफ में चूड़ी के गोदामों पर ताले लटके थे। चूड़ी के कारखानों में शुक्रवार से सन्नाटा पसरा है। यहां भी चूड़ियों की खनक गायब है। इमामबाड़ा से लेकर नालबंदान तक लगने वाला चूड़ियों का बाजार भी शनिवार को नहीं लगा।

हिंदू हो या मुसलमान लाखों चूड़ी के कारोबार से जुड़े हैं। इनमें हजारों मजदूर ऐसे हैं जिनके घरों में चूल्हा तब जलता है जब एक दिन की मजदूरी उन्हें मिल जाती है। शहर में जगह-जगह टुकड़ों में खड़े लोगों की पथराई आंखों में उपद्रव करने वालों के प्रति गुस्सा दिख रहा था। गुस्सा इस बात का था कि चंद शरारती तत्वों ने सुहागनगरी की शांत फिजा को अपने दंगाई मंसूबों से खराब कर दिया और उन्हें बेरोजगार कर दिया।

इमामबाड़ा पर खड़े राशिद, कयूम और अशरफ बोले काम बंद है गोदाम खुलते तो काम मिल जाता है। इनमें से कोई चूड़ी के गोदाम पर फूट बजाता है तो कोई चूड़ी की छटाई करता है। पल्लेदार चूड़ी बाजार बंद होने से खाली हाथ बैठे रहे।
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