चंद शरारती तत्वों के सिवाए कोई नहीं चाहता कि कांच की इस नगरी का शांत माहौल खराब हो। सुहाग की प्रतीक चूड़ियां बनाने वाले इस शहर का उद्योग कौमी एकता की मिसाल है। मुस्लिम कारीगरों की बनाई चूड़ियां महिलाओं की कलाई की शोभा बनती हैं।
चूड़ी और कांच उद्योग का पूरा ढांचा हिंदू-मुस्लिमों के सामंजस्य से बंधा है। यही कारण है कि जब-जब शरारती तत्वों ने माहौल खराब करने की कोशिश की है तब-तब अमन पसंद लोगों ने इस कृत्य की सामूहिक रूप से निंदा की है।
शुक्रवार को सुहागनगरी में हुए उपद्रव के कारण चूड़ियों की खनक खामोश रही। शहर के प्रमुख चूड़ी बाजार गली बौहरान में दिन भर खननके वाली चूड़ियां खनक नहीं रही थी। इमामाबाडा से लेकर शीशग्रान का चूड़ी बाजार बंद था।