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गिजोली प्रकरण: लापरवाही पर चौकी प्रभारी निलंबित, गांव में अभी तनाव बरकरार....फोर्स तैनात

Wed, 17 Sep 2025 10:18 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

गिजोली गांव में अभी सबकुछ शांत नहीं है। यहां सोमवार रात एक बार फिर हुई मारपीट की घटना ने माहौल को गरमा दिया। 
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agra police - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के खंदौली थाना क्षेत्र के गिजोली गांव में सोमवार की रात एक बार फिर मारपीट की सूचना ने माहौल को गरमा दिया। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने लापरवाही पर चौकी प्रभारी अनुराग को निलंबित कर दिया है। गांव में अभी भी भारी तनाव को देखते हुए पीएसी और पुलिस फोर्स तैनात की गई है। सोमवार देर रात पुलिस कमिश्नर गांव पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
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मंगलवार को पुलिस ने दो और वांछित आरोपी हरेंद्र और हरिबाबू को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले अजीत, ओमवीर और बलवीर को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मामले में पुलिस ने दो अलग तहरीर पर कुल आठ लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था वही मंगलवार को राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन भी गिजोली गांंव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर गांव में शांति नहीं चाहते।

सांसद ने सख्त शब्दों में कहा अगर दबंगों में इतनी ही बहादुरी है तो वे सीमा पर जाकर अपनी ताकत दिखाएं। पूर्व प्रधान छीतर सिंह की पत्नी ने सुमन को बताया कि आरोपी राजीनामा का दवाब बनाने के लिए तीन दिनों से उन पर हमला कर रहे हैं। सोमवार की रात भी आरोपियों ने दहशत फैलाने के लिए सड़कों पर लगे बल्बो को फोड़ दिया। एसीपी एत्मादपुर देवेश कुमार से आरोपियों के खिलाफ रासुका लगा कर जेल भेजने की मांग उठाई।
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भडकाऊ पोस्टो से बिगड़ रहा माहौल
खंदौली। राज्यसभा सांसद जब गांव गिजोली पहुंचे तो पीड़ित पक्ष ने उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 17 सेकेंड का एक वीडियो दिखाई। वीडियो में आरोपी समाज के लोग कह रहे है कि तेरी बदमाशी का भूत जल्द ही उतारा जाएगा। यह देख रामजीलाल सुमन का पारा चढ़ गया और थाना को आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने की बात कही।

                        
पंचायत चुनाव गिजोली में झगड़े की जड़
गिजोली गांव का मामूली झगड़ा अब जातीय तनाव में बदल गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस विवाद की जड़ पंचायत चुनाव है। प्रधानी के दावेदार अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश में हैं। यही वजह है कि एक हंसी-मजाक से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते जातीय संघर्ष में तब्दील हो गया। गांव में करीब 2700 वोट हैं, जिनमें से लगभग 500 जाटव और 300 बघेल वोट अहम माने जाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि जाटव वोट जिस प्रत्याशी के साथ जाता है, उसकी जीत लगभग तय हो जाती है।

पिछले चुनाव में यह सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित थी। उस समय मैदान में तीन जाट प्रत्याशी थे। लुकमान चौधरी को जाटव समुदाय का समर्थन मिला और उन्होंने जीत दर्ज की। वहीं, दिनेश चौधरी 170 वोट से हार गए थे। तब से ही दिनेश चौधरी लगातार चुनावी तैयारियों में जुटे हैं और इस बार जाटव वोट अपने पक्ष में करने की भरसक कोशिश कर रहे हैं।
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