बरगद का पेड़
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पिता पुत्र एक साथ लड़े थे आजादी की लड़ाई
देश की आजादी की लड़ाई ग्राम नरौली निवासी रामलाल एवं उनके पुत्र नंद किशोर ने एक साथ लड़ी थी। देश के आजाद होने के कुछ दिनों बाद स्वतंत्रता सेनानी रामलाल की मृत्यु हो गई। जबकि स्वतंत्रता सेनानी नंद किशोर के पुत्र रघुवीर सिंह व मोहर सिंह एवं इनकी संतानें आज भी गांव में रहती हैं।
लाल सिंह की स्मृतियां ही हैं शेष
ग्राम नरौली निवासी स्वतंत्रता सेनानी लाल सिंह की गांव में अब स्मृतियां ही शेष रह गई हैं। उनके तीन बेटियां हैं। जिनकी शादी हो चुकी है। तीनों ही अपनी ससुराल में रहती हैं। उनका कोई बेटा नहीं हैं। गांव में उनका एक मकान है जो देखभाल के अभाव में पूरी तरह से खंडहर हो चुका है। जिसमें ग्रामीण अपने पशुओं को बांध लेते हैं।
बरगद के पेड़ के नीचे बनती थी रणनीति
गांव का एक पुराना बरगद का पेड़ आजादी के आंदोलन का गवाह है। इस पेड़ के नीचे बैठकर ही आजादी के आंदोलन की रणनीति बनाते थे। ग्रामीणों ने इस पेड़ को सहेज कर रखा है। पेड़ के चारों ओर बाउंड्री करा दी है और पास में ही एक मंदिर का निर्माण कर लिया है। जिसमें ग्रामीण प्रतिदिन पूजा करने के लिए जाते हैं।